अप्रैल से सितंबर तक केरल में निपाह वायरस का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी
केरल सरकार ने अप्रैल से सितंबर 2026 तक निपाह वायरस का मौसमी अलर्ट जारी किया है। यह अवधि फल खाने वाले चमगादड़ों की सक्रियता और फलों के मौसम से मेल खाती ...और पढ़ें

केरल में निपाह वायरस का मौसमी अलर्ट (फोटो- AI)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केरल सरकार ने पिछले वर्षों के प्रकोपों के आधार पर राज्य में अप्रैल से सितंबर 2026 तक निपाह वायरस का सीजनल अलर्ट जारी किया है। क्योंकि, इस दौरान फल खाने वाले चमगादड़ों की सक्रियता और फलों के फलने-फूलने के मौसम से मेल खाता है।
दरअसल, निपाह वायरस दुनिया के घातक वायरल संक्रमणों में से एक है। चमगादड़ों से इंसानों में फैलने वाले इस जानलेवा वायरस की उच्च मृत्यु दर (40% से 75%) है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे अधखाए फलों और चमगादड़ों के संपर्क से बचें।
बता दें कि निपाह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से मनुष्यों में फैलता है। 2018 से यह वायरस केरल में कई बार फैल चुकी है। यह वायरस गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी और जानलेवा एन्सेफलाइटिस का कारण है।
अप्रैल से सितंबर के बीच ही क्यों जारी किया गया अलर्ट?
पिछले वर्षों में देखे गए आकड़ों के आधार पर अप्रैल से सितंबर के बीच निपाह वायरस का अलर्ट जारी किया गया है। अप्रैले से सितंबर के दौरान चमगादड़ों के मानव बस्तियों के निकट संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैलते हैं। चमगादड़ की लार या मूत्र से दूषित फलों का सेवन, साथ ही संक्रमित जानवरों या मनुष्यों के संपर्क में आने से फैलता है।
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वर्तमान में इसका कोई स्वीकृत टीका या स्पेशल एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है। इसलिए केरल के स्वास्थ्य विभाग ने अप्रैल से सितंबर के दौरान जोखिम को कम करने के लिए चेतावनी जारी की है।
निपाह वायरस लक्षण और जोखिम
निपाह वायरस संक्रमण की शुरुआत आमतौर पर बुखार, सिरदर्द और खांसी जैसे फ्लू जैसे लक्षणों से होती है, लेकिन यह तेजी से तीव्र एन्सेफलाइटिस में बदल सकता है, कई मामलों में, यह बीमारी कुछ ही दिनों में घातक साबित होती है। वैश्विक स्वास्थ्य अनुमानों के अनुसार 40% से 75% तक हो सकती है।
क्या करें क्या न करें?
- आंशिक रूप से खाए गए या दूषित फलों का सेवन करने से बचें।
- फलों का सेवन करने से पहले उन्हें अच्छी तरह धो लें।
- चमगादड़ों या बीमार जानवरों के संपर्क से बचें।
- बुखार या तंत्रिका संबंधी लक्षणों जैसे किसी भी लक्षण की सूचना जल्द से जल्द दें।
- स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में संक्रमण नियंत्रण प्रथाओं का पालन करें।
केरल को 2018, 2021, 2023 और 2024 में निपाह वायरस के कई प्रकोपों का सामना करना पड़ा है, लेकिन इस दौरान इसे बहुत तेजी से कंट्रोल कर लिया गया। 2018 में इस संक्रमण की चपेट में आने वाले कई लोगों की जान गई थी।