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    बारिश और ओले ने बढ़ाई ठिठुरन, पहाड़ों पर भारी बर्फबारी... कल कैसा रहेगा मौसम; पढ़ें वेदर अपडेट

    Updated: Wed, 28 Jan 2026 12:06 AM (IST)

    उत्तर भारत में भारी बारिश और बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद है और श्रीनगर हवाई अड्डे की सभी उड़ानें रद्द कर दी गई ह ...और पढ़ें

    पर्यटन स्थल सोलंगनाला व अटल टनल रोहतांग में लगभग डेढ़ फीट बर्फ गिरी

    पर्यटन स्थल सोलंगनाला व अटल टनल रोहतांग में लगभग डेढ़ फीट बर्फ गिरी

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    जागरण टीम, नई दिल्ली। उत्तर भारत में मंगलवार की सुबह एक बार फिर मौसम ने करवट बदली। निचले क्षेत्रों में दिनभर रुक-रुक कर वर्षा होती रही। पहाड़ों पर बर्फबारी भी हुई। इससे सड़क, रेल और हवाई संपर्क बुरी तरह प्रभावित रहा। जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने से जगह-जगह वाहनों की लंबी कतारें लग गईं हैं। बर्फबारी व कम दृश्यता के चलते श्रीनगर हवाई अड्डे पर आने और जाने वाली सभी 58 उड़ानें रद रहीं।

    इससे कश्मीर का सड़क व हवाई संपर्क देश के अन्य हिस्सों से कटा रहा। कश्मीर घूमकर वापस जाने वाले पर्यटक भी फंसकर रह गए हैं। जानकारी के अनुसार, काजीगुंड और बनिहाल के बीच भारी बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। बर्फबारी के कारण श्रीनगर के लिए दो यात्री ट्रेन रद कर दी गईं। ताजा हिमपात व वर्षा से पूरे प्रदेश में कड़ाके की ठंड है। श्रीनगर में मंगलवार को अधिकतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस के साथ यह मौजूदा सर्दियों का सबसे ठंडा दिन रहा।

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    किसानों के लिए यह वर्षा फायदेमंद

    कृषि विज्ञानियों का कहना है कि गेहूं, चना और जौ की फसलों का काम करने वाले किसानों के लिए यह वर्षा फायदेमंद होगी। उत्तराखंड में एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार जोरदार बर्फबारी हुई है। उच्च हिमालय में मंगलवार सुबह से ही बर्फबारी का क्रम जारी है, जबकि निचले क्षेत्रों में रिमझिम वर्षा होती रही। चमोली की नीती घाटी के गमशाली और कोषा गांव में मंगलवार दोपहर बर्फीला तूफान चलने से कई घरों की छतें उड़ गईं। केदारनाथ धाम में दूसरे दिन भी लगातार बर्फबारी जारी रही।

    केदारनाथ धाम में करीब दो फीट तक बर्फ जम गई है और तापमान माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भी उत्तराखंड के उच्च हिमालय में बर्फबारी व निचले क्षेत्रों में वर्षा का पूर्वानुमान है। दिल्ली में 2022 के बाद से मंगलवार को चार वर्षों में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई। दिल्ली में जनवरी माह की कुल वर्षा 24 मिमी तक पहुंच गई, जो 2022 के बाद से जनवरी में सर्वाधिक है।

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    सबसे अधिक वर्षा वाला दिन आठ जनवरी

    हाल के वर्षों में जनवरी का सबसे अधिक वर्षा वाला दिन आठ जनवरी 2022 रहा है, जब शहर में 40.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में तेज बारिश हुई। कुछ जिलों में ओलावृष्टि भी हुई। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में लखनऊ और आसपास जिलों के साथ पूर्वी यूपी के भी कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के पूर्वानुमान हैं। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार ¨सह के मुताबिक बुधवार को लखनऊ में वज्रपात का भी अलर्ट है।

    राजस्थान के एक दर्जन जिलों में रुक-रुक कर बारिश हुई, चार जिलों में पांच से दस मिनट तक ओले गिरे। आकाशीय बिजली गिरने सीकर में एक महिला और कोटा में एक युवक की मौत हो गई। जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने कहा कि अगले दो दिन प्रदेश के अधिकांश क्षेत्र में घना कोहरा छाएगा। हिमाचल के रोहतांग, शिंकुला, बारालाचा व कुंजुम दर्रों में भारी हिमपात। मनाली के पास स्थित पर्यटन स्थल सोलंगनाला व अटल टनल रोहतांग में लगभग डेढ़ फीट बर्फ गिरी।

    हिमपात से वाहनों की आवाजाही बंद

    कुफरी से नारकंडा तक हिमपात से वाहनों की आवाजाही बंद रही। भारी हिमपात व वर्षा के अलर्ट के कारण मनाली और बंजार उपमंडलों में शिक्षण संस्थान बंद रहे। हरियाणा में नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण 11 जिलों में ओलावृष्टि हुई। 15 से अधिक जिलों में वर्षा हुई। इन जिलों के 200 के करीब गांवों में ओले पड़े हैं।

    मध्य प्रदेश के तीन जिलों में ओलावृष्टि हुई और छह जिलों में वर्षा हुई। मौसम विभाग के अनुसार यह सिलसिला बुधवार को भी जारी रह सकता है। पंजाब में मंगलवार सुबह शुरू हुआ वर्षा का क्रम दिनभर जारी रहा। लुधियाना, पटियाला, रूपनगर और मानसा जिले में कुछ समय के लिए ओलावृष्टि भी हुई।

    गेहूं, चना और जौ की फसलों को होगा फायदा

    पंजाब के कृषि विशेषज्ञ डा. बलदेव सिंह के अनुसार, जनवरी में वर्षा से गेहूं, चना और जौ की फसलों को फायदा होगा। ओलावृष्टि कुछ जिलों में ही बहुत कम समय के लिए हुई, जिससे नुकसान की संभावना कम है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे गेहूं के साथ-साथ सब्जियों वाली फसलों के खेतों में पानी जमा न होने दें।

    चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के गेहूं विशेषज्ञ डॉ. ओपी बिश्नोई ने बताया कि मौजूदा ओलावृष्टि से गेहूं सुरक्षित है, लेकिन सरसों को नुकसान हो सकता है। ठंड और नमी बढ़ने से गेहूं का दाना बेहतर बनेगा। उन्होंने पीला रतुआ रोग को लेकर किसानों को सतर्क रहने और खेतों का नियमित निरीक्षण करने की सलाह दी। गेहूं में अभी बालियां नहीं निकली हैं, इसलिए ओलावृष्टि से गेहूं को नुकसान नहीं हुआ।

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