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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Vote For Note: वोट के बदले नोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना ही फैसला, कहा- सांसद-विधायक को छूट नहीं

    By Agency Edited By: Piyush Kumar
    Updated: Mon, 04 Mar 2024 11:27 AM (IST)

    Note for vote case वोट के बदले नोट मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना पुराना फैसला पलट दिया है। अगर कोई विधायक या सांसद पैसे लेकर सदन में भाषण या वोट दे त ...और पढ़ें

    supreme court of india note for vote case: सुप्रीम कोर्ट ने अपना पुराना फैसला खारिज कर दिया।(फोटो सोर्स: जागरण)
    supreme court of india note for vote case: सुप्रीम कोर्ट ने अपना पुराना फैसला खारिज कर दिया।(फोटो सोर्स: जागरण)

    HighLights

    1. सात जजों के बैंच ने फैसला सुनाया।
    2. सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 105 का हवाला दिया।
    3. सासंदों को कानूनी संरक्षण देने से कोर्ट ने इनकार कर दिया है।

    एएनआई, नई दिल्ली। वोट के बदले नोट के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। बेंच ने 26 साल पुराने अपने पिछले फैसले को पलट दिया है। सीजेआई ने सांसदों को राहत देने पर असहमति जाहिर की है।

    सात जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया है। अब अगर सांसद पैसे लेकर सदन में भाषण या वोट देते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा। 

    सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी को घूसखोरी की कोई छूट नहीं है। रिश्वत लेकर वोट देने पर अभियोजन को छूट नहीं दी जाएगी। 

    कोर्ट के पिछले फैसले को खारिज किया

    सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा,"हम पीवी नरसिम्हा मामले में फैसले से असहमत हैं। वहीं, कोर्ट के पिछले फैसले को खारिज किया जा रहा है। ‘पीवी नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई मामले’ में पिछले 25 साल यानी 1998 में सदन में ‘वोट के बदले नोट’ मामले में सांसदों को मुकदमे से छूट की बात कही थी।  

    कोर्ट ने अनुच्छेद 105 का किया जिक्र 

    बहुमत के फैसले में पांच जजों की पीठ ने तब पाया कि सांसदों को अनुच्छेद 105 (2) और 194(2) के तहत सदन के अंदर दिए गए किसी भी भाषण और वोट के बदले आपराधिक मुकदमे से छूट है। अनुच्छेद 105 और 194 संसद और विधानसभाओं में सांसदों और विधायकों की शक्तियों और विशेषाधिकारों से संबंधित हैं।

    रिश्वतखोरी भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा: कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट का मानना ​​है कि विधायकों द्वारा भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी भारतीय संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को नष्ट कर देती है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा,"आज सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने कहा कि अगर कोई सांसद राज्यसभा चुनाव में सवाल पूछने या वोट देने के लिए पैसे लेता है, तो वे अभियोजन से छूट का दावा नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोट देने के लिए पैसे लेना या प्रश्न पूछना भारतीय संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को नष्ट कर देगा।"

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