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    तेल महंगा, रुपया कमजोर: OMC कंपनियों पर दोहरी मार, कीमतें बढ़ने के संकेत

    Updated: Sat, 21 Mar 2026 09:27 PM (IST)

    पश्चिम एशिया संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और रुपये के कमजोर होने से भारतीय तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) पर दोहरी मार पड़ी है। ...और पढ़ें

    तेल महंगा रुपया कमजोर OMC कंपनियों पर दोहरी मार कीमतें बढ़ने के संकेत (फाइल फोटो)

    तेल महंगा रुपया कमजोर OMC कंपनियों पर दोहरी मार कीमतें बढ़ने के संकेत (फाइल फोटो)

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और रुपये के डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट ने भारतीय तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) पर दोहरी मार डाल दी है।

    भारतीय क्रूड बास्केट कीमत फरवरी 2026 में औसतन 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी जो मार्च में अब तक 117.09 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। वैश्विक ब्रेंट क्रूड भी 112.19 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जो फरवरी अंत से 60 फीसद की तेजी दर्शाता है।

    डॉलर के मुकाबले कितना पहुंचा रुपया?

    इस बीच, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 93.49 (21 मार्च) के स्तर पर पहुंच गया है, जो 28 फरवरी को 91.07 के स्तर पर था। तेल कंपनियों का अनुमान होता है कि अगर क्रूड एक डॉलर महंगा हो जाता है तो उन्हें 16,000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।

    मौजूदा माहौल में देश में पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमत बढ़ाये जाने की संभावना कम है लेकिन तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल (दो रुपये प्रति लीटर) व बल्क डीजल (22 रुपये प्रति लीटर) को महंगा करके संकेत दिया है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर है।फरवरी और मार्च के बीच महंगे क्रूड व कमजोर होते रुपये का असर तेल कंपनियों के मार्जिन पर भी बहुत ज्यादा पड़ना तय है।

    तेल उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि अगस्त, 2025 से फरवरी, 2026 के बीच क्रूड की कीमत 62 से 69 डॉलर रही है और इस दौरान तेल कंपनियों ने प्रति लीटर पेट्रोल पर 5-10 रुपये और डीजल पर 8-15 रुपये की मार्जिन (लागत, टैक्स आदि देने के बाद बिक्री मूल्य से अंतर) अर्जित की है।

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    लेकिन अब पेट्रोल पंप तक पेट्रो उत्पादों को पहुंचाने की लागत काफी बढ़ चुकी है। मोटे तौर पर पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी (बिक्री मूल्य व कुल लागत का अंतर) 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 40 रुपये तक पहुंच चुकी है। सनद रहे कि फरवरी, 2022 के बाद से इंडियन आयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम व भारत पेट्रोलियम ने पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।

    दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर व डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। इसके अलावा युद्ध जोखिम प्रीमियम, फ्रेट और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई हैं। रिटेल कीमतें स्थिर होने से उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है, लेकिन कंपनियां घाटा उठा रही हैं।

    क्या संकेत दे रहीं ब्रोकरेज कंपनियां?

    इस बारे में ब्रोकरेज कंपनियां भी अब संकेत देने लगी हैं। एम्बिट व यूबीएस की रिपोर्ट बताती है कि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से उपर रहता है तो वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में एचपीसीएल घाटे में जा सकती है जबकि आइओसी व बीपीसीएल का मुनाफा 50 फीसद तक घट सकता है।

    लंबे समय तक अंडर-रिकवरी से कैश फ्लो सूख सकता है, कर्ज बढ़ सकता है और सरकार को सब्सिडी या एक्साइज ड्यूटी कटौती करनी पड़ सकती है। हालांकि सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि अभी आम जनता पर मूल्य वृद्धि का कोई बोझ नहीं डाला जाएगा।

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