राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस में खुली बगावत, टिकट बंटवारे और वर्चस्व को लेकर मची रार
स्थानीय निकाय चुनाव से ठीक पहले अजमेर कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट समर्थक नेताओं ने शहर जिला कांग्रेस ...और पढ़ें

राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस में खुली बगावत
HighLights
पायलट खेमे ने जिला कांग्रेस कमेटी को नकारा, पार्टी को होगा नुकसान
विजय जैन बोले-धर्मेंद्र राठौड़ चला रहे थे समानांतर कांग्रेस
जागरण संवाददाता, अजमेर। स्थानीय निकाय चुनाव से ठीक पहले अजमेर कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट समर्थक नेताओं ने शहर जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के गठन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।
कांग्रेस कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम में जुटे नेताओं ने आरोप लगाया कि संगठन में योग्य और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर बंद कमरे में मनमाने ढंग से नियुक्तियां की गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधरी तो निकाय चुनाव में कांग्रेस को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन ने खुलकर आरोप लगाया कि धर्मेंद्र सिंह राठौड़ वर्षों तक शहर में समानांतर कांग्रेस चलाते रहे और पार्टी को कमजोर करने का काम करते रहे।
उन्होंने कहा कि उस समय अजमेर क्लब समानांतर गतिविधियों का केंद्र बना हुआ था और उन्हें डॉ राजकुमार जयपाल का संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को गुमराह कर वर्तमान शहर कांग्रेस कमेटी की घोषणा करवा दी गई।
दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी ने भी डीसीसी गठन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों को पदाधिकारी बनाया गया है, उनमें से कई को पिछले दस वर्षों में न तो किसी वार्ड कार्यक्रम में देखा गया और न ही बूथ स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के भरोसे कांग्रेस चुनाव कैसे जीतेगी?
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गौरतलब है कि कांग्रेस कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम की घोषणा दो दिन पहले ही सोशल मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से कर दी गई थी। प्रारंभिक अटकलों के विपरीत कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि वर्तमान डीसीसी को लेकर संगठन के भीतर गहरा असंतोष है।
वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि कांग्रेस को निकाय चुनाव में मजबूती से उतरना है तो संगठन को बंद कमरों से निकालकर कार्यकर्ताओं के बीच ले जाना होगा, अन्यथा अंदरूनी असंतोष चुनाव में पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है।