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'पेपर लीक रोकने के लिए कदम उठा रही सरकार', राष्ट्रपति मुर्मु ने राष्ट्र के नाम संबोधन में दिया भरोसा

Updated: Fri, 14 Aug 2026 10:16 PM (IST)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रणाली में सुधार का भरोसा दिया

राष्ट्रपति ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया (फोटो: स्क्रीनग्रैब)

राष्ट्रपति ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया (फोटो: स्क्रीनग्रैब)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए छात्रों-युवाओं को पेपर लीक रोकने से लेकर परीक्षा प्रणालियों में सुधार का कदम उठाए जाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार के लिए बड़े कदम उठा रही है ताकि पेपर लीक और गलत तरीकों पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके और सिस्टम को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके।

राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला देश हित विशेषकर किसानों के हित में एक निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध वह ऐतिहासिक ऑपरेशन भारतीय सेनाओं की अचूक क्षमता का प्रमाण है। आतंकियों और उनके समर्थकों को यह कठोर संदेश दिया गया कि वे चाहे कहीं भी जाकर छिप जाएं लेकिन उन्हें अपने किए की सजा जरूर मिलेगी।

परिसीमन बिल को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच राष्ट्रपति ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण कार्यान्वयन की भी पैरोकारी की। परीक्षा में सुधार और पेपर लीक रोकने की सरकार की ओर से कदम उठाए जाने का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि छात्र भारत के भविष्य निर्माता हैं और जिस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार तथा समाज का एकजुट रहना जरूरी है उसी तरह विद्यार्थियों के वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी सभी के सम्मिलित प्रयास जरूरी हैं।

सार्वजनिक परीक्षाएं विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं। इसलिए सरकार इन परीक्षाओं में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है। इन सुधारों का उद्देश्य है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर पूरी तरह से अंकुश लगे, परीक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी, तथा युवाओं के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद हो। नीट पेपर लीक के खिलाफ हाल में हुए जेन-जी छात्रों के आंदोलन के मद्देनजर राष्ट्रपति की यह टिप्पणी अहम है।

सिंधु जल संधि निलंबित करने के भारत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सत्य और न्याय के पक्ष में मानवता विरोधी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने की भारतीय परंपरा पर हम गर्व करते हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने सैन्य से लेकर विज्ञान तथा खेल के क्षेत्र में महिलाओं की लगातार बढ़ती भूमिका का जिक्र करते हुए महिला आरक्षण के कार्यान्वयन की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान कर रही हैं।

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं का 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व आरक्षित करने के लिए वर्ष 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया जा चुका है। इस अधिनियम के लक्ष्य को प्राप्त करने से महिलाओं का नेतृत्व बढ़ेगा तथा हमारा लोकतंत्र और अधिक समावेशी बनेगा। परिसीमन विधेयक संसद से पारित कराने के लिए पिछले कुछ अर्से से मोदी सरकार के किए जा रहे प्रयासों के मद्देनजर राष्ट्रपति की यह टिप्पणी सरकार के भविष्य के इरादों का साफ संकेत है।

राष्ट्रपति ने कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका को अपने-अपने उत्तरदायित्वों को निभाने का संदेश देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें। कार्यपालिका का कर्तव्य है कि जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को कार्यरूप दे। न्याय-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। हर नागरिक विशेषकर वंचित वर्गों को समानता के आधार पर सम्मान के साथ समय से न्याय मिलना चाहिए।

राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण की महत्ता रेखांकित करते हुए कहा कि प्राकृतिक संपदाओं पर हमारी भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है जितना हमारा है और हमें सुनिश्चित करना होगा कि आने वाली पीढ़ियों द्वारा इस अधिकार के प्रयोग में तनिक भी कमी न हो। भारत की आर्थिक प्रगति पर संतोष जताते हुए मुर्मु ने कहा कि विश्व के अनेक क्षेत्रों में युद्ध एवं अस्थिरता का सभी देशों पर प्रभाव पड़ रहा है।

ऐसी परिस्थिति में भी हमारे देश की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है। आर्थिक अनुमानों के अनुसार भारत की विकास दर विश्व की औसत विकास दर की तुलना में दोगुने से अधिक रहेगी। देश को नक्सल मुक्त बनाने को उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उत्साह का वातावरण है तथा विकास की सर्वस्पर्शी धारा प्रवाहित हो रही है।

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