यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जापान दौरे से पहले थाईलैंड में रुके पीएम, तिलमिलाया चीन; बढ़ी चिंता
दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु करार पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, साथ ही सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के कदमों पर भी चर्चा होगी ।

नई दिल्ली, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान दौरे के क्रम में आज कुछ देर के लिए थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में रुके । उन्होंने थाईलैंड के दिवंगत राजा भूमिबोल को श्रद्धांजलि दी। पीएम के जापान दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु करार पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है,जापान के साथ शिनमाएवा विमानों की खरीद को मंजूरी मिल सकती है। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर और एनएसजी के मुद्दे पर भी चर्चा होगी ।
मोदी के जापान दौरे से चीन में खलबली
चीनी मीडिया में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत ने जापान के साथ मिलकर दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर हस्तक्षेप किया और चीन को अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल का आदेश मानने को बाध्य करने की कोशिश की, तो उसे बड़ा नुकसान हो सकता है। साउथ चाइना सी पर भारत दावेदार नहीं है।लेकिन जब से मोदी आए हैं, भारत ने 'लुक ईस्ट' विदेश नीति अपना रखी है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि दक्षिण चीन सागर के विवाद में शामिल होने से भारत अमेरिका का सिर्फ एक मोहरा बनकर रह जाएगा। चीन के साथ व्यापारिक नुकसान का उसे खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा। इस विवाद में पड़ने से भारत का कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि नई दिल्ली और बीजिंग के बीच भरोसा टूटेगा।
तीन दिवसीय जापान दौरे के बीच बैंकॉक में रूके मोदी, देखें तस्वीरें
जापान के प्रतिनिधिमंडल ने महापौर से ली कचरा प्रबंधन की जानकारी
भारत और जापान के रिश्ते पर एतराज
ग्लोबल टाइम्स के ही दूसरे आर्टिकल में चीन ने भारत व जापान के बीच बढ़ रहे रिश्ते पर भी आपत्ति जताई है।
जापान के साथ भारत के सिविल न्यूक्लियर डील के बारे में चीन ने कहा कि जापान ने अपने नियमों में ढील की।
चीन ने बुलेट ट्रेन पर भी सवाल उठाए। भारत की अंडर डेवलप इकोनॉमी में जापान की महंगी हाई स्पीड तकनीक वाले इस रेल प्रोजेक्ट से कोई फायदा होगा भी, यह कहा नहीं जा सकता। गौरतलब है कि चीन भी भारत में अपना हाई स्पीड ट्रेन नेटवर्क शुरू करना चाहता है। इसके लिए वह दिल्ली-चेन्नई के बीच रेलवे कॉरिडोर की संभावनाओं की स्टडी भी कर रहा है।
एनएसजी मामले पर फिर धमकाया
चीन ने एनएसजी सदस्यता को लेकर भी भारत को धमकाया है। भारत जानता है कि नियमों के मुताबिक अब तक वह एनएसजी मेंबरशिप के लिए फिट नहीं है।चीन ने कहा कि वो भारत की सदस्यता का विरोध नहीं कर रहे हैं। लेकिन हमें ये ध्यान रखना होगा कि नियम-कानून का उल्लंघन न हो।
EAS में बोले PM- ‘ एशिया की सदी बनाने के लिए आगे आएं सभी देश ’
जापान के सम्राट से मिलेंगे पीएम
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी अपने जापानी समकक्ष शिंजो अबे के साथ वार्षिक शिखर स्तरीय बैठक करेंगे और जापान के सम्राट से भी मिलेंगे। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु करार पर भी हस्ताक्षर किये जाने की उम्मीद है जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका स्थित शीर्ष परमाणु कंपनियों का भारत में संयंत्र स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। पिछले दिसंबर में अबे की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने इस बारे में व्यापक सहमति बनायी थी लेकिन अंतिम करार पर हस्ताक्षर नहीं किया जा सका था क्योंकि कुछ तकनीकी और कानूनी पहलुओं को सुलझाया जाना बाकी था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने पिछले सप्ताह कहा था कि दोनों देशों ने करार के मसौदे के जुड़े कानूनी एवं तकनीकी पहलुओं समेत आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया है।
दक्षिण सागर पर चीन ने भारत को किया आगाह
यह पूछे जाने पर कि क्या मोदी की यात्रा के दौरान करार पर हस्ताक्षर किये जायेंगे, स्वरूप ने कहा था कि, ‘मैं बातचीत के परिणामों के बारे में पहले से कुछ आकलन नहीं कर सकता।’ भारत और जापान के बीच परमाणु करार के विषय पर बातचीत कई वषरे से जारी है लेकिन इसके बारे में प्रगति रूकी हुई थी क्योंकि फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा संयंत्र में 2011 में दुर्घटना के बाद जापान में राजनीतिक प्रतिरोध की स्थिति थी।

