'विरोध प्रदर्शनों को वित्तीय सहायता देना विदेशी फंड का दुरुपयोग नहीं', केरल हाई कोर्ट की टिप्पणी
केरल हाई कोर्ट ने दो एनजीओ के एफसीआरए नवीनीकरण को रद करने के केंद्र के फैसले को पलट दिया, जिन पर विझिंजम विरोध प्रदर्शनों को वित्तीय सहायता देने का आर ...और पढ़ें

केरल हाई कोर्ट में विरोध प्रदर्शनों में वित्तीय सहायता मिलने पर टिप्पणी (फाइल फोटो)
HighLights
केरल हाई कोर्ट ने एफसीआरए नवीनीकरण रद करने का फैसला पलटा।
विरोध को वित्तीय सहायता देना विदेशी फंड का दुरुपयोग नहीं।
विझिंजम बंदरगाह के खिलाफ प्रदर्शनों से जुड़ा था मामला।
डिजिटल डेस्क, कोच्चि। केरल हाई कोर्ट ने केंद्र के उस निर्णय को रद कर दिया जिसमें दो एनजीओ के एफसीआरए प्रमाणपत्र को नवीनीकरण के लिए अस्वीकार किया गया था।
इन एनजीओ पर केंद्रीय एजेंसियों ने विझिंजम समुद्री बंदरगाह के खिलाफ आंदोलनों को वित्तीय सहायता देने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि किसी विरोध को वित्तीय सहायता देना विदेशी फंड का दुरुपयोग नहीं माना जा सकता।
केरल हाई कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत विरोध का अधिकार सुनिश्चित किया गया है और इसलिए, प्रदर्शनकारियों को वित्तीय सहायता देना विदेशी फंड का दुरुपयोग नहीं माना जा सकता है, जो किसी अवांछनीय उद्देश्य या जनहित के खिलाफ हो।
कोर्ट ने कहा, "जब विरोध का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित किया गया है, तो ऐसे अधिकारों का प्रयोग 'अवांछनीय उद्देश्य' या जनहित के खिलाफ नहीं माना जा सकता।"
कोर्ट ने कहा कि "कार्यकारी या प्रशासनिक असहमति" को विरोध या असहमति के लिए संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार को 'अवांछनीय उद्देश्य' में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इसलिए, भले ही यह मान लिया जाए कि कुछ वित्तीय सहायता प्रदर्शनकारियों को दी गई थी, इसे अवांछनीय उद्देश्य के लिए विदेशी योगदान का दुरुपयोग नहीं माना जा सकता।"
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता एनजीओ 'केरल सोशल सर्विस फोरम और सेव ए फैमिली प्लान इंडिया' और किसी भी प्रदर्शनकारी के बीच कोई वित्तीय संबंध नहीं था।
कोर्ट ने कहा,"इसलिए, नवीनीकरण के इनकार में उत्तरदाताओं की कार्रवाई अवैध है और इसमें हस्तक्षेप किया जाना चाहिए।"
कोर्ट ने कहा कि खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि विझिंजम में आंदोलनरत मछुआरों के समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले त्रिवेंद्रम के लैटिन कैथोलिक आर्चडायसिस (एलसीएटी) ने आंदोलन का नेतृत्व किया था और 29 एनजीओ में से नौ एफसीआरए के तहत पंजीकृत थे, जिनमें से पांच की सक्रिय एफसीआरए स्थिति थी।
दो एनजीओ के नाम न तो पांच सक्रिय एफसीआरए स्थिति वाले संगठनों में थे और न ही उन 29 एनजीओ की सूची में जो आंदोलन में शामिल हुए थे। यह न्याय का मजाक है कि किसी भी विरोध का हिस्सा न होने के बावजूद याचिकाकर्ताओं के एफसीआरए प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन को अस्वीकार किया गया।
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कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के एफसीआरए के तहत प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के इन्कार को मनमाना व अवैध माना गया है। याचिकाकर्ताओं को अपने प्रमाणपत्रों के नवीनीकरण का अधिकार है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय को नए आदेश देने का निर्देश
कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ताओं के एफसीआरए के तहत पंजीकरण के प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए आदेशों को रद किया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय समेत उत्तरदाताओं में से सक्षम को उपरोक्त टिप्पणियों के संदर्भ में नए आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। किसी भी स्थिति में इस निर्णय की प्राप्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर इसका अनुपालन करें।"
बंदरगाह निर्माण रोकने को हुआ था प्रदर्शन
2022 में एक बड़ी संख्या में मछुआरों ने तिरुअनंतपुरम में विझिंजम बहुउद्देशीय समुद्री बंदरगाह के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर चार महीने से अधिक समय तक प्रदर्शन किया था और प्रदर्शनकारियों ने अपने सात बिंदुओं के मांग पत्र पर जोर दिया, जिसमें बंदरगाह निर्माण कार्य को रोकना और बहु-करोड़ परियोजना के संबंध में तटीय प्रभाव अध्ययन करना शामिल था।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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