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    'गुमराह कर रहे राहुल' चीनी सेना वाले बयान पर राजनाथ सिंह का पलटवार, रिजीजू बोले- नियमों का उल्लंघन कर रहे विपक्षी नेता

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 11:34 PM (IST)

    लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के चीनी घुसपैठ संबंधी बयान पर तीखी नोक-झोंक हुई। उन्होंने पूर्व सेनाध्यक्ष की अप्रकाशित ...और पढ़ें

    राजनाथ सिंह, राहुल गांधी और किरन रिजीजू

    राजनाथ सिंह, राहुल गांधी और किरन रिजीजू 

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में सोमवार को तीखी नोक-झोंक हुई।

    नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चीनी सेना की घुसपैठ के संदर्भ में पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक और एक मैगजीन की रिपोर्ट का हवाला देने पर सत्तापक्ष ने सख्त आपत्ति जताई।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि वह सदन को गुमराह कर रहे हैं। राजनाथ और गृह मंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बीच स्पीकर ओम बिरला ने सदन के नियमों का हवाला देते हुए ऐसे उद्धरणों की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विपक्ष ने हंगामा किया।

    राहुल गांधी ने चीन पर अप्रकाशित पुस्तक का हवाला दिया

    समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और राजद समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी कांग्रेस का साथ दिया। दोनों पक्षों के अड़े रहने से सदन में 50 मिनट तक तीखी नोक-झोंक चलती रही। लिहाजा कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी और अंतत: दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। पहले ही दिन संवेदनशील मुद्दे पर हुआ यह विवाद बताता है कि आगे भी हंगामा जारी रह सकता है।

    हंगामे के दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में 18 घंटे और राज्यसभा में 16 घंटे चर्चा तय है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी खड़े हुए और उनसे पहले बोल चुके भाजपा सदस्य तेजस्वी सूर्या द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रवाद पर उठाई गई आपत्तियों का जवाब देने लगे।

    इसी क्रम में उन्होंने 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पूर्व थलसेनाध्यक्ष की अप्रकाशित पुस्तक के हवाले से चीन से संघर्ष के बारे में बताना चाहते हैं। यहीं से विवाद शुरू हो गया। दरअसल यह पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई क्योंकि इसके तथ्यों पर सवाल है।

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    राजनाथ सिंह ने राहुल के बयान को गुमराह करने वाला बताया

    राजनाथ ने तुरंत पूछा कि क्या यह पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। जब राहुल स्पष्ट नहीं कर पाए कि पुस्तक प्रकाशित है तो राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि वह सदन को गुमराह कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि अप्रकाशित किताब या अप्रमाणित सामग्री का हवाला संसद में नहीं दिया जा सकता।

    उन्होंने कहा कि इस तरह के उद्धरण से सदन में भ्रम फैलता है और देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर गलत संदेश जाता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राहुल किसी मैगजीन की रिपोर्ट के आधार पर गलत तथ्य पेश कर रहे हैं।

    उन्होंने सदन से आग्रह किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर सरकार एवं रक्षा मंत्री पर भरोसा किया जाना चाहिए। अप्रमाणित रिपोर्टों पर नहीं।

    राहुल को भाजपा सदस्य तेजस्वी सूर्या के उस बयान पर भी आपत्ति थी, जिसमें सूर्या ने दावा किया कि संप्रग कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण में देश की सांस्कृतिक चेतना और विरासत का उल्लेख नहीं होता था।

    इस पर कुछ कांग्रेस सदस्यों ने विरोध किया, जिस पर अमित शाह ने बचाव करते हुए कहा कि सूर्या अभिभाषण की सामग्री की बात कर रहे हैं, किसी विशेष नेता की नहीं। स्पीकर के बार-बार हस्तक्षेप और नियम-कायदों का हवाला देने के बावजूद राहुल बार-बार उन्हीं मुद्दों पर लौटते दिखे जिसके कारण कार्यवाही बाधित रही।

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने स्पीकर के फैसले का पालन करने को आग्रह किया। उन्होंने कि अगर विपक्ष के नेता बार-बार स्पीकर के फैसले को नजरअंदाज करते हैं और नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो सदन को इस बात पर चर्चा करनी होगी कि ऐसे सदस्य के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।

    रिजीजू ने कहा कि राहुल गांधी सदन के नियमों का पालन नहीं करके युवा सांसदों के लिए गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं। उन्हें ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए जो सेना का अपमान करती हों।

    बाद में पत्रकारों से बातचीत में रिजीजू ने राहुल गांधी पर स्पीकर के आदेश की अवहेलना और सदन का समय बर्बाद करने का आरोप लगाया।

    उन्होंने सदन के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अगर किताबें, पत्रिकाएं और खबर के अंश कार्यवाही से संबंधित नहीं हैं, तो बहस के दौरान उन्हें कोट नहीं किया जा सकता।

    राहुल ने संसद की गरिमा गिराई : भाजपा

    भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी ने स्पीकर ओम बिरला के फैसले की अवहेलना करके इस मुद्दे पर बोलने पर अड़े रहने के लिए राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने एक्स पर कहा, 'यह जिद पर अड़े राहुल गांधी के वैचारिक दिवालियापन की पराकाष्ठा है।

    विदेश की धरती से देश और भारतीय सेना की छवि खराब करने के बाद राहुल गांधी ने अब संसद के अंदर भी देश को बदनाम करना और भारत के बहादुर सैनिकों का अपमान करना शुरू कर दिया है।'

    बलूनी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने न केवल संसद की गरिमा को कम किया, बल्कि अपने लगातार झूठे आरोपों और गुमराह करने वाले बयानों से बहादुर भारतीय सैनिकों का मनोबल भी गिराया।

    राहुल गांधी को कैसे पता चला कि उस किताब में क्या लिखा है?

    उन्होंने सवाल किया, 'राहुल गांधी को कैसे पता चला कि उस किताब में क्या लिखा है जो अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है? उसके अलावा स्पीकर द्वारा मना किए जाने के बावजूद सदन में बार-बार उसी निराधार दावे को दोहराना न केवल पीठ का अपमान है, बल्कि देश और सशस्त्र बलों का भी अपमान है।

    यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्पीकर के बार-बार हस्तक्षेप के बावजूद राहुल गांधी बिना किसी सुबूत के सदन के पटल से देश को गुमराह कर रहे थे।'

    भाजपा नेता ने कहा, 'पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने कई मंचों पर बताया है कि कैसे हमारे बहादुर सैनिकों ने डोकलाम में चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया।'

    राहुल पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता संसद में दुश्मनों की भाषा बोल रहे थे।

    उन्होंने कहा, ''यह सोनिया गांधी का घर नहीं है। यह लोकसभा है। यह स्पीकर के फैसलों और नियम पुस्तिका में बताए गए नियमों के अनुसार काम करेगी।'