'पीएम सिर्फ वहीं करते हैं जो...' मिडिल ईस्ट पर पीएम मोदी के बयान पर राहुल गांधी ने साधा निशाना
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी के बयान की कड़ी आलोचना की। राहुल ने आरोप लगाया कि पीएम अमेरिका-इजरायल के इशारे पर क ...और पढ़ें
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राहुल गांधी ने पीएम मोदी की विदेश नीति को 'कॉम्प्रोमाइज्ड' बताया
HighLights
राहुल गांधी ने पीएम मोदी की विदेश नीति को 'कॉम्प्रोमाइज्ड' बताया
खरगे ने पश्चिम एशिया पर पीएम के बयान को देर से आया कहा
होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित न होने पर सवाल
संजय मिश्र, नई दिल्ली। संसद में दोनों सदनों के विपक्षी नेताओं राहुल गांधी तथा मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम एशिया संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान में किसी तरह का रणनतिक दृष्टिकोण नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन पर सियासी निशाना साधा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ वही करते हैं जो अमेरिका तथा इजरायल करवाना चाहते हैं और वे भारत के हित के फैसले ले ही नहीं सकते।
पश्चिम एशिया युद्ध में भारत की कोई रणनीतिक भूमिका नहीं होने को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत की मौजूदा विदेश नीति प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत विदेश नीति है जिसका नतीजा सबके सामने है और हर कोई इसे एक वैश्विक मजाक मानता है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी की विदेश नीति को 'कॉम्प्रोमाइज्ड' बताया
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने फिर से आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति आज 'कॉम्प्रोमाइज्ड'है क्योंकि पीएम मोदी खुद 'कॉम्प्रोमाइज्ड' हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध से उपजे संकट को लेकर आगाह करते हुए राहुल ने कहा कि अभी तो शुरुआत है, आने वाले दिनों में एलपीजी, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइजर समेत तमाम क्षेत्रों में समस्या पैदा होंगी।
पश्चिम एशिया पर सरकार के सर्वदलीय बैठक बुलाने पर कहा कि यह ठीक है चर्चा होनी चाहिए मगर वे पहले से तय कार्यक्रम के तहत बुधवार को दिल्ली से बाहर के दौरे पर रहेंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने राज्यसभा में मंगलवार को पीएम मोदी के पश्चिम एशिया पर बयान के बाद एक्स पोस्ट में कहा यह बयान बहुत देर से आया है और जवाब देने के बजाय ज्यादा सवाल खड़े करता है।
खरगे ने पश्चिम एशिया पर पीएम के बयान पर क्या कहा?
खरगे ने पूछा कि क्या अपने असंगत और बदलते कूटनीतिक रवैये के जरिए पीएम ने भारत की लंबे समय तक रही रणनीतिक स्वायत्तता का संतुलन बिगाड़ दिया है। संसद और देश को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया।
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खरगे ने कहा कि करीब 37-40 भारतीय झंडे वाले जहाज जिनमें लगभग 1100 नाविक सवार हैं होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं जिन पर 10,000 करोड़ रुपए का माल लदा है।
पीएम मोदी के ईरानी राष्ट्रपति से दो बार बात करने और विदेशमंत्री के अपने ईरानी समकक्ष के साथ कई बार बातचीत के बावजूद इन जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में सरकार क्यों विफल रही है? जबकि चीन, रूस, जापान जैसे देशों और अन्य 'मित्र देशों' को सुरक्षित मार्ग दिया जा रहा है।
पश्चिम एशिया युद्ध की तुलना कोविड महामारी जैसी
खरगे ने कहा कि पीएम ने संसद में दावा किया है कि भारत ने अपने ऊर्जा आयात को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक फैलाया है तो फिर पूरे देश में नागरिकों को एलपीजी के लिए लंबी कतारों, कालाबाजारी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया युद्ध की तुलना 'कोविड जैसी' स्थिति से करने पर खरगे ने कहा कि इस महामारी के दौरान हुई दुखद पीड़ा को नहीं भूला जा सकता जब 40 लाख से ज्यादा जानें चली गईं और अनगिनत नागरिक ऑक्सीजन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करते रह गए।
ऐसे में पीएम क्या 140 करोड़ भारतीयों को एक बार फिर खुद ही ऊर्जा संकट के साथ-साथ भोजन, उर्वरक और महंगाई के बढ़ते दबाव जैसे संकट का सामना करने के लिए कह रहे हैं।