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    'रेलवे ने सुरक्षा मंत्र मजबूत किया, चालू वित्त वर्ष में सिर्फ दो ट्रेन दुर्घटनाएं', संसद में बोले रेल मंत्री वैष्णव

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 06:27 AM (IST)

    रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि भारतीय रेलवे की सुरक्षा को प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन और बेहतर रखरखाव के ...और पढ़ें

    रेलवे मंत्री ने कहा- प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन से रेल हादसों में भारी कमी आई

    रेलवे मंत्री ने कहा- प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन से रेल हादसों में भारी कमी आई

    HighLights

    1. रेलवे मंत्री ने कहा- प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन से रेल हादसों में भारी कमी आई

    2. एक टीटीई को अ​धिकतम पांच एसी या तीन स्लीपर कोच की जिम्मेदारी

    आईएएनएस, नई दिल्ली। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि भारतीय रेलवे की सुरक्षा को प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन और बेहतर रखरखाव के जरिये मजबूत किया गया है।

    इसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी आई है। 2026-27 में अब तक केवल दो बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं हुई हैं जोकि सुरक्षा में सुधार का संकेत है।

    एक सवाल के जवाब में उन्होने कहा कि स्वदेशी कवच 4.0 सुरक्षा प्रणाली को 2,490 किलोमीटर रूट पर लागू किया गया है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा ट्रैक शामिल हैं।

    इसके अलावा 21,937 किलोमीटर ट्रैक पर भी कार्य प्रगति पर है। यह प्रणाली लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा के भीतर ट्रेनों को चलाने में मदद करती है। यदि लोको पायलट ऐसा करने में विफल रहता है तो स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर और खराब मौसम में भी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

    उन्होंने बताया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआइडी) टैग और टेलीकाम टावर पूरे ट्रैक पर लगाए जा रहे हैं। ट्रैक के साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है। 4.0 सेफ्टी सिस्टम भारतीय रेलवे के लिए सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

    सुरक्षा उपायों के तहत 30 जून 2026 तक 6,671 स्टेशनों पर इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग सिस्टम लागू किया गया है ताकि मानव त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।

    एक टीटीई को अधिकतम पांच एसी या तीन स्लीपर कोच की जिम्मेदारी

    प्रेट्र के अनुसार, भारतीय रेलवे में एक टिकट निरीक्षक (टीटीई) को अधिकतम पांच एसी कोच या तीन चेयरकार या स्लीपर कोच की जिम्मेदारी दी जा सकती है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब मे यह जानकारी दी।

    उन्होंने बताया कि किसी भी ट्रेन में टीटीई की संख्या पहले से तय नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्रेन में कुल कितने डिब्बे हैं और उनमें एसी, स्लीपर या चेयर कार कोच कितने-कितने हैं। इस व्यवस्था से उपलब्ध कर्मचारियों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

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    जींद-सोनीपत सेक्शन पर यातायात लोड को संभालने के लिए वर्तमान लाइन क्षमता पर्याप्त

    प्रेट्र के अनुसार, हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच सिंगल रेलवे लाइन पर वर्तमान में 10 यात्री ट्रेनों और आठ मालगाड़ियां चलती हैं। इस यातायात लोड को सहन करने के लिए वर्तमान लाइन क्षमता पर्याप्त है।

    वैष्णव ने कहा कि सोनीपत दिल्ली-अंबाला मुख्य मार्ग पर स्थित है और जींद दिल्ली-भटिंडा लाइन पर है। जींद-सोनीपत के बीच 90 किलोमीटर लंबी सिंगल लाइन इन दोनों मुख्य लाइनों (दिल्ली-अंबाला और दिल्ली-भटिंडा) को जोड़ती है।

    सोनीपत से कांग्रेस सांसद कांग्रेस सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने पूछा था कि क्या मंत्रालय इस ट्रैक की क्षमता और ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।