देश में खेती प्रधान 12 राज्यों में बारिश की भारी कमी, नहीं देखने को मिला मानसून का असर
देश के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद भी मानसून की कमी का असर देखने को मिला है। खेती प्रधान राज्यों में बारिश की कमी पाई गई है। ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
HighLights
देश में मानसून की कमी 12% से घटकर 11% हुई।
खेती-प्रधान 12 राज्यों में भारी बारिश की कमी दर्ज।
बुवाई के बाद हुई बारिश से कृषि पर सीमित प्रभाव।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पिछले एक हफ्ते में दिल्ली, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान में अच्छी बारिश से इन इलाकों में बारिश की कमी को पूरा करने में मदद मिली लेकिन इससे पूरे देश में मानसून की कमी पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा।
इस दौरान भारत में कुल बारिश की कमी में एक प्रतिशत की कमी आई। यह 2 अगस्त को 12% से घटकर 9 अगस्त को 11% हो गई। बिहार, झारखंड, यूपी, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे कई खेती-प्रधान राज्यों में अभी भी कम बारिश हो रही है।
फसलों की बुआई के बाद हुई बारिश
इसके अलावा कई इलाकों में बारिश तब हुई जब देश के कुल बोए गए क्षेत्र के लगभग 88% हिस्से में खरीफ की फसलों की बुआई पूरी हो चुकी थी। नतीजतन, पिछले एक हफ्ते में बुआई वाले क्षेत्र की कमी में केवल 1% तो मुख्य खरीफ फसल धान की बुआई का क्षेत्र पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में अभी भी 4% कम है।
फिर भी अगस्त की बारिश से जलाशयों में पानी का भंडारण बेहतर होगा जो पनबिजली क्षमता के इस्तेमाल और अगले बुआई के मौसम के लिए बैक-अप तैयार होने के लिहाज से एक अच्छा संकेत है।
12 राज्यों में बारिश की भारी कमी
रविवार तक 12 राज्यों में बारिश की भारी कमी (20% या उससे ज्यादा) दर्ज की गई है। इन इलाकों में बिहार, झारखंड और यूपी में देश का मानसून कोर जोन (मुख्य मानसून क्षेत्र) शामिल है, जहां सिंचाई की खराब व्यवस्था के कारण खेती मुख्य रूप से मौसमी बारिश पर निर्भर करती है।
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इन राज्यों में बढ़ सकती है बारिश की गतिविधि
हालांकि, मौसम विभाग ने रविवार को भविष्यवाणी की कि गुरुवार के आसपास उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश तटों पर कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना के कारण 13 अगस्त से बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में बारिश की गतिविधि बढ़ सकती है। इससे बिहार और झारखंड में धान और मक्के की बुआई में कुछ हद तक तेजी आ सकती है।
कहां कितनी रही बारिश की कमी
क्षेत्र के हिसाब से देखें तो मध्य भारत को छोड़कर सभी क्षेत्रों में जुलाई और अगस्त के पहले हफ्ते में सामान्य बारिश के बावजूद कुल मानसून बारिश में कमी दर्ज की गई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा 25% की कमी दर्ज की गई, इसके बाद दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 17% और उत्तर-पश्चिम भारत में 11% की कमी रही।