घर-घर पहुंचे कार्यकर्ता, गुस्से को वोट में बदला... बंगाल में परदे के पीछे से संघ ने कैसे दिलाई भाजपा को जीत?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की डेढ़ दशक लंबी तैयारी और जमीनी रणनीति ने बंगाल चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई। ...और पढ़ें
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बंगाल विजय के बाद जश्न मनाते कार्यकर्ता

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बंगाल चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत हुई। इस जीत के साथ ही ममता के 15 साल के शासन का अंत हुआ। भाजपा की जीत के पीछे वैसे तो अनेक फैक्टर रहे, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की करीब डेढ़ दशक लंबी तैयारी भी काम आई।
साल 2011 में राज्य में करीब 530 शाखाएं थीं, जो 2500 से ज्यादा हो चुकी हैं। पिछले साल में 583 नई शाखाएं खुलीं। चुनाव से पहले संघ ने पर्दे के पीछे रहकर एक लाख से ज्यादा छोटी बैठकों के जरिए परिवर्तन का नैरेटिव सेट कर दिया।
आइए जानते हैं संघ के 5 असरदार कदम क्या रहे?
पीड़ितों का सुरक्षा 'कवच'
2021 की हिंसा के बाद संघ सुरक्षा कवच की भूमिका में आया। पीड़ितों के घर जाकर आर्थिक और कानूनी मदद दी। शीर्ष नेतृत्व से संवाद कराया। संदेश गया कि संगठन साथ है।
संदेशखाली की आवाज
संघ में संदेशखाली जैसे इलाकों में सीधे टकराव के बजाय भरोसे की रणनीति अपनाई। महिलाओं व पीड़ितों से संवाद के जरिए उन्हें बात उठाने को प्रेरित किया। बड़ी संख्या में लोग सामने आए।
बाहरी नैरेटिव खत्म: सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर काम किया। स्थानीय त्योहारों, विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस जैसे
महापुरुषों और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए भाजपा को स्थानीय विकल्प के रूप में पेश किया।
डर तोड़ने का अभियान
गांव-मोहल्ले तक पहुंच वोटर्स वर्कर्स में भरोसा बनाया कि निडर हो वोट दें। लोगों को बूथ तक लाने की तैयारी की। हर क्षेत्र - बूथ की जमीनी स्थिति भाजपा तक पहुंचाई।
मुद्दों की लड़ाई
शिक्षक भर्ती घोटाला, आरजीकर व अन्य मामलों को परिवार और महिलाओं की सुरक्षा व भविष्य से जोड़ा। मुद्दे गांव और शहरी मध्यमवर्ग तक पहुंचाए । असंतोष को वोट में बदलने का माहौल बना।
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