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थलापति विजय की TVK ने कौन सी ऐसी गलती कर दी कि तमिलनाडु में हो गया इतना बड़ा ड्रामा? एस. गुरुमूर्ति ने बताया

Published: Sat, 09 May 2026 03:09 PM (IST)

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस गहरा गया है, जहां थलापति विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता से दूर है।

टीवीके की एक गलती से मच गई तमिलनाडु की राजनीति में उथल-पुथल। (फाइल फोटो)

टीवीके की एक गलती से मच गई तमिलनाडु की राजनीति में उथल-पुथल। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. TVK ने राज्यपाल से संपर्क में तकनीकी गलती की।

  2. कांग्रेस की "गलत सलाह" ने स्थिति बिगाड़ी।

  3. तमिलनाडु में सरकार गठन पर गहराया सस्पेंस।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु में बीतते दिनों के साथ सरकार बनाने को लेकर सस्पेंस गहराता ही जा रहा है। भले ही थलापति विजय की पार्टी राज्य में सबसे ज्यादा सीटें जीत ली हों लेकिन वह सत्ता की दहलीज से दूर है। फिलहाल सरकार किसकी बनेगी इसको लेकर सस्पेंस बरकार है। इन सबके बीच टीवीके की गलती उजागर हुई है।

राजनीतिक टिप्पणीकार एस. गुरुमूर्ति ने बताया कि अभिनेता-राजनेता विजय को कांग्रेस ने "गलत सलाह" दी थी कि वे राज्य में सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर नहीं, बल्कि गठबंधन सरकार के साथ राज्यपाल से संपर्क करें।

कांग्रेस ने टीवीके को नहीं दिया बिना शर्त समर्थन

गुरुमूर्ति के अनुसार, कांग्रेस ने विजय की 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) को कम्युनिस्ट पार्टियों की तरह बिना शर्त समर्थन नहीं दिया, जो 'हॉर्स ट्रेडिंग' (खरीद-फरोख्त) की शुरुआत का संकेत है।

टीवीके ने कहां की गलती?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा, "टीवीके के सलाहकारों ने पूरी बात बिगाड़ दी, क्योंकि पहले उन्हें एक बहुत ही वरिष्ठ राजनेता ने सलाह दी थी कि वे यह दावा करें कि वे सबसे बड़ी पार्टी हैं और उन्हें सरकार बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। तब शायद गवर्नर के पास उस अनुरोध पर विचार करने के अलावा कोई और चारा नहीं होता। लेकिन मुझे बताया गया है कि कुछ अन्य लोगों ने जोर दिया और कांग्रेस ने भी जोर दिया कि वे अपना पत्र भी साथ में जोड़ें और कहें कि यह एक गठबंधन सरकार होगी। मुझे लगता है कि यहीं पर तकनीकी रूप से मामला एक अकेली पार्टी द्वारा सरकार बनाने से हटकर एक गठबंधन द्वारा सरकार बनाने की ओर मुड़ गया।"

उन्होंने आगे कहा, "तो गवर्नर एक मुश्किल स्थिति में पड़ गए। जाहिर है वह यह नहीं कह सकते कि आप 'हॉर्स ट्रेडिंग' कर रहे हैं। यह एक राजनीतिक समझौता है, चुनाव के बाद का समझौता। उन्हें विजय से और पत्र जमा करने के लिए कहना पड़ा, ताकि यह साबित हो सके कि उनके पास 118 का बहुमत है। ऐसा लगता है कि गवर्नर की यही स्थिति थी। मुझे नहीं लगता कि गवर्नर ने तकनीकी रूप से कोई गलती की, क्योंकि ऐसा लगता है कि टीवीके ने ही गलती की है, उन्हें गलत सलाह दी गई।"

विजय ने दी थी एक चिट्ठी

विजय ने एक चिट्ठी दी जिसमें उन्होंने 120 लोगों के समर्थन का दावा किया था लेकिन वह सिर्फ कवरिंग लेटर था। उसके साथ लगी चिट्ठी में सिर्फ 116 विधायकों का समर्थन दिख रहा था।

उन्होंने कहा, "232 सदस्यों वाले सदन में भाजपा को छोड़कर, 116 विधायकों का मतलब है कि यह संख्या सिर्फ 116 है। यह एक टाई है। यह एक बेहद अनोखी स्थिति है। गवर्नर क्या करेंगे? उनसे वह चिट्ठी दिखाने के लिए किसने कहा था? मुझे बताया गया है कि कांग्रेस चाहती थी कि वह चिट्ठी दिखाई जाए ताकि यह पक्का हो सके कि इसे एक गठबंधन सरकार माना जाए, न कि विजय की पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि यह एक छोटी और बचकानी सलाह है, जिसने न केवल विजय को बल्कि तमिलनाडु को भी मुश्किल में डाल दिया है।" गुरुमूर्ति ने कहा कि इस भारी हंगामे के बीच, राजनीतिक दल "मोल-भाव" और "सौदेबाजी" कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "यह बिल्कुल साफ है कि लोग टेलीविजन पर कह रहे हैं कि वे टीवीके का समर्थन करेंगे, लेकिन वे लिखित में कोई पत्र नहीं दे रहे हैं। आईयूएमएल के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। लेकिन जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, वह और भी ज्यादा अजीब है।"

गुरुमूर्ति का मानना है कि विजय अंततः तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनेंगे, क्योंकि उन्हें उन पार्टियों का अधिक समर्थन प्राप्त है जो अपने फैसले पर अडिग हैं जैसे कि कांग्रेस और सीपीएम। राजनीतिक टिप्पणीकार के अनुसार, दक्षिणी राज्य में चल रहा यह घटनाक्रम सोमवार, 10 मई तक सुलझ जाएगा।

क्या AIADMK-DMK गठबंधन होगा?

गुरुमूर्ति ने बताया कि एमके स्टालिन की डीएमके प्रत्यक्ष सत्ता छोड़ने की स्थिति में नहीं है और वह AIADMK के जरिए अप्रत्यक्ष सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, "AIADMK पिछले पांच सालों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने इस चुनाव में बहुत सारा पैसा लगाया है, जिसका उन्हें कोई रिटर्न नहीं मिला। इसलिए, जाहिर है AIADMK एक एटीएम की तरह होगी और डीएमके इसका फायदा उठाना चाहेगी। ये दोनों पार्टियां एक-दूसरे का आईना हैं। दोनों ही भ्रष्ट पार्टियां हैं। फर्क बस इतना है कि हम AIADMK को इसलिए माफ कर देते हैं क्योंकि वह डीएमके जितनी देश-विरोधी नहीं है।"

उन्होंने कहा, "उन्होंने तमिलनाडु में सार्वजनिक जगह पर कब्जा कर लिया है। उन्हें बहुत फायदा हुआ है। विजय ने खुद को साबित किया है वजह चाहे जो भी हो। मुझे नहीं पता कि वह सफल होंगे या नहीं, क्योंकि टीवीके के बारे में जिस तरह की बातें मैं सुनता हूं, उन्हें देखते हुए मुझे नहीं लगता कि वे राजनीति को बहुत सफलतापूर्वक संभाल पाएंगे। लेकिन खैर, उन्होंने अब दोनों पार्टियों और तमिलनाडु की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। तमिलनाडु की राजनीति पिघल गई है। भविष्य में यह किस दिशा में जाएगी, मुझे नहीं पता। लेकिन अभी, तमिलनाडु में पूरी तरह से राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है।"

AIADMK-DMK गठबंधन की बातचीत को "तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा धोखा" बताते हुए गुरुमूर्ति ने कहा, "लोगों ने दोनों पार्टियों को नकार दिया है, जो पिछले 60 सालों से राजनीति के मैदान में बनी हुई थीं। यह एक बहुत बड़ा बदलाव है। मैं यह नहीं कह रहा कि विजय सफल होंगे। विजय तमिलनाडु की राजनीति को पिघलाने में सफल रहे हैं। उन्होंने दोनों द्रविड़ पार्टियों के बीच की जगह को जमा दिया है। और वे उस जगह को छोड़ना नहीं चाहते।"

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