Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'सतलुज' विवाद गहराया: समीक्षा समिति करेगी फिल्म के भविष्य का फैसला, केंद्र का बड़ा एक्शन

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 06:44 PM (IST)

    दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' (पूर्व नाम 'पंजाब 95') रिलीज के दो दिन बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से हटा दी गई है। ...और पढ़ें

    समीक्षा समिति करेगी फिल्म 'सतलुज' के भविष्य का फैसला। (फाइल)

    समीक्षा समिति करेगी फिल्म 'सतलुज' के भविष्य का फैसला। (फाइल)

    HighLights

    1. 'सतलुज' फिल्म जी5 से रिलीज के दो दिन बाद हटी।

    2. केंद्र ने सुरक्षा चिंताओं पर अंतर-विभागीय समिति बनाई।

    3. समिति फिल्म के भविष्य पर फैसला करेगी, संशोधन या प्रतिबंध।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पिछली सदी के अंतिम दशक में पंजाब के अशांत दौर और मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' (पूर्व नाम 'पंजाब 95') इन दिनों गहरे विवादों में है। यह फिल्म रिलीज के महज दो दिन बाद ही रोक दी गई।

    तीन जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर बिना किसी सेंसर कट के रिलीज हुई इस फिल्म को 'सुरक्षा चिंताओं' के चलते पांच जुलाई को हटा दिया गया था। अब केंद्र सरकार इस मामले को आइटी (सूचना और प्रसारण) नियम 2021 के तहत गठित एक अंतर-विभागीय समिति को सौंपने की तैयारी में है, जो इसके भविष्य का फैसला करेगी।

    सेंसर बोर्ड को दरकिनार करने का आरोप

    सूत्रों के मुताबिक, फिल्म निर्माता थिएटर रिलीज के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा सुझाए कट्स को टालते रहे और इसे चुपचाप नए नाम 'सतलुज' के साथ ओटीटी पर रिलीज कर दिया।

    SATLUJ

    चूंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर सेंसर बोर्ड के दायरे में नहीं आते, इसलिए निर्माताओं ने इस कानूनी ढाल का फायदा उठाने की कोशिश की। जब यह बात सरकार के संज्ञान में आई, तो देश की संप्रभुता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जी5 को तुरंत इसे हटाने का निर्देश दिया गया।

    खबरें और भी

    आपातकालीन शक्तियों और नियमों का हवाला

    हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईटी नियमों के तहत 'आचार संहिता' पर रोक लगा रखी है, लेकिन सरकार ने नियम 16 के तहत अपनी 'आपातकालीन शक्तियों' का इस्तेमाल किया। सूचना और प्रसारण मंत्रालय, गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय जैसे कई विभागों के प्रतिनिधियों वाली यह समिति अब फिल्म की गहन समीक्षा करेगी।

    समिति के पास फिल्म में संशोधन करने, चेतावनी जारी करने या सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने की सिफारिश करने का अधिकार है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कला की अभिव्यक्ति और राष्ट्र की सुरक्षा के इस टकराव में 'सतलुज' की धारा आगे बढ़ पाती है या नहीं।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

    यह भी पढ़ें- 'पंजाब में बने सत्य, जवाबदेही एवं मेल-मिलाप आयोग', सतलुज फिल्म विवाद पर पूर्व IAS डॉ. जगमोहन सिंह राजू की बड़ी मांग