'पंजाब में बने सत्य, जवाबदेही एवं मेल-मिलाप आयोग', सतलुज फिल्म विवाद पर पूर्व IAS डॉ. जगमोहन सिंह राजू की बड़ी मांग
सतलुज फिल्म विवाद के बीच पूर्व आईएएस डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने पंजाब के राज्यपाल से 'सत्य, जवाबदेही एवं मेल-मिलाप आयोग' के गठन की मांग की है। ...और पढ़ें

सतलुज फिल्म विवाद पर पूर्व IAS डॉ. जगमोहन सिंह राजू की बड़ी मांग (फाइल फोटो)
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाबी फिल्म 'सतलुज' के रिलीज होने के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के विवाद के बीच पंजाब के पूर्व आईएएस अधिकारी डा जगमोहन सिंह राजू ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर पंजाब में 'पंजाब ट्रुथ, अकाउंटेबिलिटी एंड रिकंसिलिएशन कमीशन' (सत्य, जवाबदेही एवं मेल-मिलाप आयोग) गठित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि 1980 से 2000 के बीच पंजाब में हिंसा और आतंकवाद के दौर से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर आज भी समाज में अलग-अलग और परस्पर विरोधी धारणाएं हैं। ऐसे में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष आयोग बनाकर इस पूरे दौर की सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
डॉ राजू ने 7 जुलाई को राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा कि 'सतलुज' फिल्म के रिलीज होने और फिर अचानक हटाए जाने से यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या पंजाब के सबसे दर्दनाक दौर से जुड़ी पूरी सच्चाई कभी निष्पक्ष तरीके से सामने आ सकी है।
अलग-अलग कथाओं और धारणाओं में बंटा राज्य
चार दशक बीतने के बावजूद राज्य आज भी विभिन्न घटनाओं को लेकर अलग-अलग कथाओं और धारणाओं में बंटा हुआ है। उन्होंने लिखा कि विवादित स्मृतियों के आधार पर पंजाब का शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण भविष्य नहीं बनाया जा सकता।
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पूर्व आईएएस अधिकारी ने सुझाव दिया कि प्रस्तावित आयोग को 1980 से 2000 के बीच पंजाब में आतंकवाद, हिंसा और मानवाधिकार से जुड़े मामलों का निष्पक्ष एवं प्रामाणिक दस्तावेज तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाए।
आयोग पीड़ितों, उनके परिवारों और अन्य संबंधित पक्षों को अपने अनुभव, साक्ष्य और दस्तावेज रखने का अवसर भी उपलब्ध कराए। पत्र में आयोग को सभी पीड़ितों, जिनमें आतंकवाद के शिकार, मानवाधिकार उल्लंघन से प्रभावित लोग तथा अन्य प्रभावित परिवार शामिल हैं, के लिए मुआवजा, पुनर्वास और अन्य राहत संबंधी सिफारिशें करने का अधिकार देने की भी बात कही गई है।
'पंजाब अपने अतीत को बदल नहीं सकता'
साथ ही उस दौर से जुड़े राजनीतिक उत्तरदायित्व तय करने तथा संवैधानिक व्यवस्था, मानवाधिकारों की सुरक्षा और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए संस्थागत, कानूनी और प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
डॉ राजू ने अपने पत्र के अंत में कहा कि पंजाब अपने अतीत को बदल नहीं सकता, लेकिन उसे ईमानदारी से समझकर उससे सीख जरूर ले सकता है। उनका कहना है कि सत्य की निष्पक्ष पड़ताल और मेल-मिलाप की प्रक्रिया ही आने वाली पीढ़ियों को अधिक एकजुट, शांतिपूर्ण और आत्मविश्वासी पंजाब दे सकती है। उन्होंने राज्यपाल से अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत पंजाब सरकार को इस दिशा में पहल करने के लिए प्रेरित करने का अनुरोध किया है।