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    सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रोटेस्ट पर जताई चिंता, CBI और केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 11:00 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की मौखिक टिप्पणियों के व्यावसायिक इस्तेमाल और 'सीजेपी' अभियान से जुड़े डिजिटल कंटेंट के मुद्रीकरण के खिलाफ नोटिस जा ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस (फोटो-पीटीआई)

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस (फोटो-पीटीआई)

    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक टिप्पणियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर नोटिस जारी किया।

    2. 'सीजेपी' अभियान से जुड़े डिजिटल कंटेंट के मुद्रीकरण पर चिंता जताई।

    3. फर्जी वकीलों और कानून डिग्रियों की जांच की भी मांग की गई।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें मांग की गई है कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों के इंटरनेट मीडिया कैंपेन और उनके डिजिटल कंटेंट के जरिये कथित वाणिज्यिक इस्तेमाल व उनसे पैसे कमाने के विरुद्ध सुरक्षा उपाय किए जाएं।

    फर्जी वकीलों, कानून की फर्जी डिग्रियों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की जांच की मांग वाली याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) और सीबीआइ को नोटिस जारी किया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वकील राजा चौधरी की याचिका पर सुनवाई के बाद ये नोटिस जारी किए।

    सुनवाई के लिए कोर्ट ने 10 सितंबर की तिथि तय की है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों के कथित व्यवसायिक इस्तेमाल और मौद्रीकरण के लिए प्रसारित किए जाने के विरुद्ध भी कार्रवाई की मांग की गई है।

    इसमें कहा गया है कि कोर्ट निर्देश जारी करे जिसमें सक्षम अधिकारियों को उन लोगों व संस्थाओं के विरुद्ध जांच या कार्रवाई करने का आदेश दिया जाए जो सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान मौखिक टिप्पणियों और प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों (जैसे कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियां) के व्यवसायिक इस्तेमाल, ट्रेडमार्क के दुरुपयोग, पैसे कमाने के लिए इस्तेमाल या अनधिकृत व्यवसायिक इस्तेमाल में शामिल हैं।

    साथ ही माना जाए कि निष्पक्ष आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य और संविधान द्वारा सुरक्षित अभिव्यक्ति की आजादी; संवैधानिक नैतिकता व संस्थागत गरिमा के दायरे में स्वीकार्य है। लेकिन गंभीर न्यायिक कार्यवाही और संस्थागत अभिव्यक्तियों का व्यवसायिक या व्यापारिक इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जा सकता जिससे न्यायपालिका और न्याय प्रशासन में जनता का भरोसा कम हो।

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    याचिका में यह भी मांग है कि फर्जी वकीलों, कानून की फर्जी डिग्रियों आदि से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र जांच का आदेश दिया जाए, बेहतर होगा कि वह जांच सीबीआइ या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जाए।

    यह जांच बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों द्वारा जताई गई चिंताओं और रिपोर्टों के आधार पर होनी चाहिए, जिनमें न्याय प्रशासन को प्रभावित करने वाले फर्जी या धोखेबाज वकीलों के अस्तित्व का जिक्र है।

    गौरतलब है कि यह विवाद 15 मई को एक सुनवाई के दौरान कही गई बातों से जुड़ा है। तब कथित तौर पर फर्जी डिग्री के आधार पर पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में "परजीवी" और "कॉकरोच जैसे युवा" शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।

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