नोएडा हिंसा केस में SC सख्त, गिरफ्तार दो आरोपितों को पेश करने का आदेश
नोएडा में औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार आदित्य आनंद और रूपेश राय को 18 मई को अपने समक् ...और पढ़ें
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गिरफ्तार दो आरोपितों को पेश करने का आदेश (फाइल फोटो)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हिंसा के दो आरोपितों को तलब किया।
आदित्य आनंद और रूपेश राय को 18 मई को पेश किया जाएगा।
हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों पर सुनवाई, पुलिस ने नकारा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नोएडा में 13 अप्रैल को हुए औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान ¨हसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार दो आरोपितों आदित्य आनंद और रूपेश राय को सुप्रीम कोर्ट ने अपने समक्ष पेश करने निर्देश दिया है।
शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को उन्हें 18 मई को दोपहर दो बजे अपने समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
क्या आरोप लगाया गया?
इसमें आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने आदित्य को प्रताडि़त किया और हिरासत में उसके साथ हिंसा की गई है। आनंद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कोलिन गोंसाल्विस ने दलील दी कि आदित्य एक फैक्ट्री में काम करने वाला इंजीनियर है और बच्चों के लिए एक लाइब्रेरी भी चलाता था।
स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए गोंसाल्विस ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों में आदित्य के भाषण मजदूरों के अधिकारों पर केंद्रित थे और इस दावे के समर्थन में रिकार्डिंग उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों का खंडन किया और कहा कि गिरफ्तारी में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था।
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इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए), 1980 के प्रविधान लागू किए थे। नोएडा पुलिस ने गुरुवार को दावा किया था कि सत्यम वर्मा के निजी बैंक खाते में विदेश से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की गई।
पुलिस ने क्या बताया?
यह राशि डॉलर, पाउंड और यूरो के रूप में प्राप्त हुई थी। उसने इसे कई बार अपने दूसरे निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किया था। सत्यम वर्मा ने आकृति चौधरी के साथ मिलकर श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने में अहम भूमिका निभाई थी।
पुलिस के अनुसार, वर्मा को 19 अप्रैल को लखनऊ से हिमांशु ठाकुर के साथ गिरफ्तार किया गया था। ये दोनों वामपंथी मजदूर अधिकार समूह 'बिगुल मजदूर दस्ता' के सक्रिय सदस्य हैं। वह कई ऐसे संगठनों से जुड़ा था, जिनकी गहन जांच चल रही है।