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    5000 मीटर की ऊंचाई पर भी दुश्मनों के ड्रोनों का काल बनेगा 'भार्गवास्त्र', नागपुर में सफल हुआ लाइव टेस्ट

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 03:48 PM (IST)

    सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने नागपुर में भारतीय सेना के सामने अपने स्वदेशी मल्टी-लेयर काउंटर-ड्रोन सिस्टम 'भार्गवास्त्र' का सफल परीक्षण ...और पढ़ें

    HighLights

    1. SDAL ने नागपुर में 'भार्गवास्त्र' का सफल परीक्षण किया

    2. यह स्वदेशी प्रणाली ड्रोन झुंडों से प्रभावी सुरक्षा देती है

    3. 5000 मीटर ऊंचाई तक तैनात होने में सक्षम, हवाई खतरों से सुरक्षा

    डिजिटल डेस्क, नागपुर। हवाई हमलों और खतरनाक ड्रोन स्वार्म (ड्रोन के झुंड) के बढ़ते खतरों से निपटने के लिए भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने महाराष्ट्र के नागपुर में इंडियन आर्मी के प्रतिनिधिमंडल के सामने अपने पूरी तरह स्वदेशी और मल्टी-लेयर काउंटर-ड्रोन सिस्टम 'भार्गवास्त्र' का सफल ट्रायल हुआ।

    भार्गवास्त्र देश में बना, गाड़ी पर लगने वाला, मल्टी-लेयर काउंटर-स्वार्म ड्रोन सिस्टम है। इसे हथियारबंद ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और ऑटोनॉमस ड्रोन झुंडों (स्वार्म्स) के तेजी से बढ़ते खतरों से किफायती और बहुत असरदार सुरक्षा देने के लिए डिजाइन किया गया है।

    पूरी तरह से भारत में विकसित, भार्गवास्त्र काउंटर-ड्रोन युद्ध में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि है। यह SDAL की उस दूरदर्शिता को दिखाता है, जिसमें उन्होंने ड्रोन के युद्ध के मैदान में सबसे निर्णायक हथियारों में से एक बनने से बहुत पहले ही भविष्य के युद्ध के स्वरूप का अंदाजा लगा लिया था।

    सटीक निशाना लगाने वाली माइक्रो-मिसाइलों का इस्तेमाल

    इस सिस्टम में देश में डिजाइन और विकसित किए गए अनगाइडेड रॉकेट और सटीक निशाना लगाने वाली माइक्रो-मिसाइलें इस्तेमाल की गई हैं। इन्हें मल्टी-लेयर एंगेजमेंट आर्किटेक्चर में व्यवस्थित किया गया है, जो दुश्मन के UAVs को बेअसर करने का बहुत असरदार और किफायती तरीका देता है।

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    इसे भारतीय सशस्त्र बलों के मौजूदा कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस (C4I) नेटवर्क के साथ आसानी से जोड़ने के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन्स में इसका इस्तेमाल किया जा सके।

    5000 किमी के ऊंचाई वाले इलाकों तक किया जा सकता है तैनात

    खास तौर पर भारतीय ऑपरेशनल स्थितियों के लिए बनाया गया भार्गवास्त्र रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और समुद्र तल से 5,000 मीटर तक ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जा सकता है। यह देश की पूरी जमीनी सीमाओं पर हवाई खतरों से भरोसेमंद सुरक्षा प्रदान करेगा ।

    कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर में एक एडवांस्ड C4I आर्किटेक्चर है जिसमें 10 किमी तक UAVs का पता लगाने में सक्षम रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सर्विलांस सिस्टम और पैसिव RF सेंसर शामिल हैं। ये सेंसर मल्टी-लेयर टारगेट डिटेक्शन, ट्रैकिंग और क्लासिफिकेशन की सुविधा देते हैं, जिससे हवा की स्थिति की पूरी तस्वीर बनती है और ऑपरेटर्स अलग-अलग ड्रोन या ड्रोन के झुंडों पर कार्रवाई कर सकते हैं।

    जैमिंग या स्पूफिंग पर आधारित पारंपरिक सॉफ्ट-किल सिस्टम के विपरीत, भार्गवास्त्र ऑटोनॉमस ड्रोन के खिलाफ एक असरदार हार्ड-किल समाधान देता है, जिन पर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर का कोई असर नहीं होता।

    भारतीय सेना की टीम ने की समीक्षा

    भारतीय सेना की एक टीम ने 24 जुलाई 2026 को 'मेक-II' के तहत PSO की स्थिति की समीक्षा के लिए SDAL, नागपुर का दौरा किया। भार्गवास्त्र हथियार प्रणाली का उसके पूर्ण कॉन्फ़िगरेशन में प्रदर्शन किया गया, जिसमें रडार, EO/IR और RF डिटेक्टरों से लैस कमांड एंड कंट्रोल व्हीकल (CCV) शामिल था जो C4I सिस्टम के साथ एकीकृत था, साथ ही सभी लॉन्च ट्यूबों को ले जाने वाला एक लॉन्चर वाहन भी था।

    SDAL टीम ने ड्रोन का एक झुंड उड़ाया, जिसे रडार, EO/IR और RF डिटेक्टरों ने सफलतापूर्वक डिटेक्ट कर लिया। C4I सिस्टम ने स्थिति की पूरी जानकारी दिखाई और ड्रोन हमले का अलर्ट जारी किया। इसके बाद C4I सिस्टम ने लॉन्चर को टारगेट सौंपे और वहां आई टीम को फायरिंग का पूरा प्रोसेस सफलतापूर्वक दिखाया गया। सुरक्षा कारणों से प्लांट के अंदर असल रॉकेट फायरिंग नहीं की गई। (समाचार एजेंसी ANI के इनपुट के साथ)