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शंख-अल हिंद और फ्लाईएक्सप्रेस एयरलाइंस की अब तक क्यों नहीं हुई शुरुआत, एविएशन बाजार को कैसे मिलेगा बूस्ट?

By Jaiprakash RanjanEdited By: Sakshi Gupta
Updated: Fri, 21 Aug 2026 09:06 PM (IST)

केंद्र सरकार की भारतीय उड्डयन बाजार में एकाधिकार तोड़ने की योजना सफल नहीं हो पा रही है।

कब शुरू होंगी नई एयरलाइंस?

कब शुरू होंगी नई एयरलाइंस?

HighLights

  1. नई एयरलाइंस वैश्विक संकट, पूंजी की कमी से शुरू नहीं हुईं।

  2. इंडिगो, एअर इंडिया का 91.4% बाजार पर कब्जा।

  3. विमान लीजिंग, पायलट उपलब्धता, ईंधन लागत बड़ी चुनौती।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारतीय नागरिक उड्डयन बाजार में एकाधिकार और द्वयधिकार तोड़ने की केंद्र सरकार की योजना फिलहाल आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही।

पिछले साल दिसंबर में इंडिगो के बड़े ऑपरेशन संकट के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने देश की जरूरत को देखते हुए कम से कम पांच बड़ी एयरलाइनों (प्रत्येक के पास करीब 100 विमान) को बढ़ावा देने की बात कही।

बड़ी एयरलाइंस का काम अटका

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का प्रयास भी किया।

ताजा स्थिति यह है कि पिछले कुछ महीनों में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी 63.6 फीसद से बढ़ कर 67.4 फीसदी हो गई है, जिन कंपनियों की शुरूआत की गई, वो प्रतिस्पर्द्धी बाजार में ठीक से संचालन भी शुरु नहीं कर पाई हैं।

अभी तक शुरू नहीं हुईं एयरलाइन

दिसंबर 2025 में शंख एयर उत्तर प्रदेश से, अल हिंद केरल से और फ्लाईएक्सप्रेस तेलंगाना/हैदराबाद से क्षेत्रीय सेवाएं शुरू करने वाली थीं।

जुलाई 2026 तक इनमें से कोई भी कंपनी व्यावसायिक उड़ानें शुरू नहीं कर पाई है। एक कारण पश्चिम एशिया संकट को बताया जा रहा है जिसकी वजह से इन नई कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लीज पर विमान नहीं मिल पा रहा।

शंख एयर कई बार सेवाएं शुरू करने की योजना आगे बढ़ा चुकी है। अब वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही का लक्ष्य रख रही है। जानकार बता रहें हैं कि नई एयरलाइनों को एटीआर-72 जैसे छोटे जहाज भी लीज पर नहीं मिल पा रहे।

वैसे एनओसी के बाद तीन साल का समय मिलता है, लेकिन वैश्विक विमानन सेक्टर की स्थिति को देखते हुए आगे की राह काफी कठिन नजर आ रही।

कब शुरू होंगी नई एयरलाइन?

ये कंपनियां कब संचालन शुरू करेंगी और कब बड़े रूट्स पर इंडिगो या एअर इंडिया ग्रुप को चुनौती देने में सक्षम नहीं हैं, यह कहना मुश्किल है।

डीजीसीए के ताजे आंकड़ों के अनुसार इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 67.4 फीसद पहुंच गई है, जो जून के 66.3 व साल की शुरुआत के करीब 63.6 फीसद से ज्यादा थी।

एअर इंडिया ग्रुप (एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस) की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत रही। दोनों मिलाकर 91.4 प्रतिशत बाजार पर काबिज हैं।

अकासा एयर की हिस्सेदारी 5.5 प्रतिशत और स्पाइसजेट की महज 1.6 प्रतिशत रह गई। एविएशन सेक्टर के विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा हालात में छोटी कंपनियों का टिकना लगभग असंभव है।

सबसे बड़ा कारण भारी पूंजी की जरूरत को बताया जा रहा है। एक किफायती व सीमित सेवा देने वाली एयरलाइन शुरू करने के लिए पहले पांच साल में कम से कम एक अरब डॉलर (8000-9000 करोड़ रुपये) की जरूरत पड़ती है।

छोटी कंपनियों के पास इतना फंड जुटाना मुश्किल है। विमान लीजिंग महंगी और जटिल हो गई है। पायलट उपलब्धता भी सीमित है। प्रमुख कंपनियां पहले से स्लॉट्स व प्रमुख रूटों पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

वैश्विक अस्थिरता भी काफी प्रभावित करती है। पहले यूक्रेन-रूस युद्ध, हाल के इरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ने एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) को काफी महंगा कर दिया है जिसकी चुभन हर एयलाइन महसूस कर रही है।

एयरलाइन संचालन में 40-50 फीसद तक हिस्सा सिर्फ एटीएफ का होता है। ऐसे में एटीएफ की कीमतों में वृद्धि का बहुत असर होता है।

एविएशन सेक्टर में सलाह देने वाली कंपनी सीएपीए इंडिया का कहना है कि भारतीय बाजार में मुनाफा में आने के लिए किसी भी एविएशन कंपनी को कम से कम 10 फीसद बाजार पर कब्जा करना होगा। यह छोटी कंपनियों के लिए दूर की कौड़ी है।

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