'ऑटिज्म के इलाज के लिए स्टेम सेल थेरेपी अवैध', सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एनएमसी की मुहर
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' के उपचार के लिए 'स्टेम सेल थेरेपी' को अवैध घोषित ...और पढ़ें

ऑटिज्म के लिए स्टेम सेल थेरेपी गैर-कानूनी, होगी बड़ी कार्रवाई (फोटो- एक्स)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में एनएमसी ने जारी किया परामर्श
ऑटिज्म के लिए स्टेम सेल थेरेपी गैर-कानूनी, होगी बड़ी कार्रवाई
पीटीआई, नई दिल्ली। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' के उपचार के लिए 'स्टेम सेल थेरेपी' को अवैध घोषित करते हुए एक परामर्श जारी किया है।
इस कदम का उद्देश्य महानगरों और टियर-2 शहरों में स्थित उन निजी क्लीनिकों के अवैध तौर-तरीकों पर अंकुश लगाना है, जो 'स्टेम सेल थेरेपी' के माध्यम से 'ऑटिज्म' और 'सेरेब्रल पाल्सी' का इलाज करने का दावा करते हैं।
'स्टेम सेल थेरेपी' एक आधुनिक चिकित्सा तकनीक है, जिसमें शरीर की खास कोशिकाओं का उपयोग बीमार या क्षतिग्रस्त ऊतकों को ठीक करने या बदलने के लिए किया जाता है।
सभी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों और पंजीकृत चिकित्सकों को 25 मार्च को जारी परामर्श के अनुसार, स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग अब केवल 32 बीमारियों के लिए किया जा सकता है।
इनमें एक्यूट मायलाइड ल्यूकेमिया, मल्टीपल स्केलेरोसिस, थैलेसीमिया, आस्टियोपेट्रोसिस, मल्टीपल मायलोमा, एप्लास्टिक एनीमिया/पैरोक्सिस्मल हीमोग्लोबिनुरिया, जर्म सेल ट्यूमर और मायलोफाइब्रोसिस शामिल हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की सिफारिशों के आधार पर यह परामर्श जारी किया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को हुई सुनवाई में स्टेम सेल थेरेपी के संबंध में फैसला सुनाया था।
इसके बाद आइसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने 10 मार्च को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अभिजात शेठ को पत्र लिखकर 32 ऐसी बीमारियों की सूची साझा की, जिनमें स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है।
डॉ. बहल ने पत्र में कहा कि स्टेम सेल से किया गया कोई भी इलाज जो मानक उपचार की सूची में शामिल नहीं है, या जिसे केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) या स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है, उसे अवैध माना जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।