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    मणिपुर के पूर्व सीएम के ऑडियो क्लिप की फोरेंसिक रिपोर्ट साझा करें, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 11:54 PM (GMT+05:30)

    सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को जातीय हिंसा से जोड़ने वाले ऑडियो क्लिप की फोरेंसिक रिपोर्ट कुकी संगठन के साथ साझा करने ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक रिपोर्ट साझा करने का दिया निर्देश (फोटो-पीटीआई)

    सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक रिपोर्ट साझा करने का दिया निर्देश (फोटो-पीटीआई)

    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक रिपोर्ट साझा करने का निर्देश दिया।

    2. रिपोर्ट मणिपुर के पूर्व सीएम के ऑडियो क्लिप से संबंधित है।

    3. NFSU रिपोर्ट गोपनीय रहेगी, सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) की तैयार की गई नवीनतम फोरेंसिक रिपोर्ट को उस कुकी समुदाय के संगठन के साथ साझा किया जाए, जो मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह को पूर्वोत्तर राज्य में जातीय हिंसा से जोड़ने वाले आडियो क्लिप की जांच की मांग कर रहा है।

    जस्टिस संजय कुमार और संजीव सचदेवा की पीठ ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि रिपोर्ट गोपनीय रहेगी और इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक रिपोर्ट साझा करने का दिया निर्देश

    मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सील किए गए कवर में नवीनतम रिपोर्ट (एनएफएसयू की) को रिकॉर्ड पर रखा। उन्होंने पीठ को बताया कि एनएफएसयू ने निष्कर्ष निकाला है कि व्हिसल ब्लोअर की रिकार्डिंग की पहली प्रति भी बदली गई थी और इसलिए कोई विश्वसनीय फोरेंसिक सत्यापन नहीं किया जा सकता।

    वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि फोरेंसिक प्रयोगशाला 'ट्रुथ लैब्स' द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ने 93 प्रतिशत से अधिक निश्चितता के साथ निष्कर्ष निकाला कि रिकार्डिंग में आवाज सिंह की थी।

    जस्टिस कुमार ने निर्देश दिया कि एनएफएसयू रिपोर्ट की प्रतियां पक्षों को सीलबंद लिफाफे में दी जाएं। साथ ही रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। 30 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने एक आडियो क्लिप की जांच का निर्देश दिया था, जो सिंह को जातीय हिंसा से जोड़ती थी।

    याचिकाकर्ता कुकी संगठन फार ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (केओएचयूआर) के लिए पेश भूषण के तर्क के बाद जारी किया गया था कि वे रिकार्ड पर दो घंटे से अधिक की पूरी आडियो क्लिप रख रहे हैं।

    मई 2023 में इम्फाल घाटी के मेइती और पड़ोसी पहाड़ी क्षेत्रों के कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 260 से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

    यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब पहाड़ी जिलों में "जनजातीय एकजुटता मार्च" का आयोजन किया गया था, जो मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) स्थिति की मांग पर मणिपुर हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ था।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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