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    'पुलिस को पैलेट गन का इस्तेमाल करने का अधिकार', CJP प्रदर्शन में सुरक्षाबलों के एक्शन पर SC की टिप्पणी

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 12:31 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पुलिस को असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन का इस्तेमाल करने का अधिकार है। अदालत ने दिल्ली सरकार को घायल हुए लोगों को उचित इ ...और पढ़ें

    पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी। (फोटो- एएनआई।)

    पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी। (फोटो- एएनआई।)

    HighLights

    1. पुलिस को असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन इस्तेमाल का अधिकार।

    2. सीजेपी विरोध प्रदर्शन में पैलेट गन उपयोग की जांच होगी।

    3. दिल्ली सरकार घायलों को उचित इलाज मुहैया कराएगी।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा गरमा गया है। मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि पुलिस को पैलेट गन का इस्तेमाल करने का अधिकार है।

    सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पुलिस को असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन का इस्तेमाल करने का अधिकार है। साथ ही कोर्ट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मैटेलिक पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सवाल उठाए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिया निर्देश

    वहीं कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से घायल हुए लोगों को उचित इलाज मुहैया कराए। अदालत ने यह भी कहा कि 20 जुलाई के सीजेपी विरोध प्रदर्शनों में पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच के लिए तैयार।

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर तैनात आरएएफ के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

    सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और दो पीड़ितों की ओर से दायर उस याचिका में की गई एक मांग पर सवाल उठाया, जिसमें कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए मैटेलिक पेलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई थी।

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    इसमें ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) की एडवाइजरी का जिक्र किया गया और कहा गया कि पुलिस को असाधारण स्थितियों में पैलेट गन इस्तेमाल करने का अधिकार है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सीनियर वकील वृंदा ग्रोवर की दलीलों पर ध्यान दिया।

    पुलिस और प्रदर्शनकारी दोनों इंसान

    बेंच ने फिर से कहा कि ऐसे मौके भी आते हैं जब शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर उपद्रवी कब्जा कर लेते हैं और उन्हें गलत मकसदों के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिसमें प्रदर्शनों के असली मकसद को नुकसान पहुंचाना भी शामिल है।

    ऐसी सभी स्थितियों में अलग-अलग तरह की ग्रेड कार्रवाई की जरूरत होगी। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि पुलिस को सुरक्षा के लिए जरूरी सामान दिया जाए।

    तभी वे हिंसक भीड़ के खिलाफ ग्रेडेड कार्रवाई के बारे में सोच सकते हैं। प्रदर्शनकारी और पुलिस, दोनों ही इंसान हैं और उन पर आने वाले खतरों पर एक जैसा ही रिएक्शन देते हैं।

    बेंच ने कहा कि 66 पुलिस रेगुलेशन खास हालात में पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत देते हैं। अगर आप पैलेट गन को धीरे-धीरे खत्म करना चाहते हैं, तो आपको उसी नियम को आर्टिकल 21 के खिलाफ बताकर चुनौती देनी होगी।

    आजाद ने क्या तर्क दिया?

    आजाद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पंप-एक्शन या प्रोजेक्टाइल-एक्शन वाली बंदूकों से पूरी तरह या आंशिक रूप से धातु के छर्रे (पैलेट) वाले गोला-बारूद के इस्तेमाल पर देशव्यापी रोक लगाई जाए। उनका तर्क है कि ऐसे हथियार बल प्रयोग से जुड़े संवैधानिक मानकों के अनुकूल नहीं हैं।

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