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    '...तो क्या यूपी सरकार भी झुकेगी', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट में दी गई दलील

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 03:57 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने 'संसद चलो मार्च' से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए एजेंसियों को संयम बरतने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि युवाओं को शांत करने, उनसे ...और पढ़ें

    कोर्ट ने कहा- युवाओं को शांत करने और बातचीत करने की जरूरत

    कोर्ट ने कहा- युवाओं को शांत करने और बातचीत करने की जरूरत

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की शीर्ष अदालत ने एजेंसियों से संयम बरतने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर कुछ गुमराह लोग पत्थरबाजी भी करते हैं, तो भी युवाओं को शांत करने और बातचीत करने की जरूरत है। उन्हें सलाह और काउंसलिंग की जरूरत है।

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एयर फोर्स के एक रिटायर्ड अधिकारी ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने 20 जुलाई के संसद चलो मार्च के आयोजकों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया और इसे इसी तरह की एक दूसरी याचिका के साथ जोड़ दिया।

    भड़काऊ भाषण देने का आरोप

    याचिकाकर्ता मनीष कुमार सोलंकी की तरफ से वकील रिजवान अहमद पेश हुए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के हाई-सिक्योरिटी जोन में इतनी गड़बड़ी फैलाने के बावजूद आयोजक अलग-अलग टीवी चैनलों पर जाकर भड़काऊ बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग आग को बुझने नहीं दे रहे।

    उन्होंने कहा कि राजधानी में केंद्र सरकार हद से ज्यादा झुक जाएगी, को क्या राजस्थान में भी राज्य सरकार को छात्रों की बात मानने के लिए झुकना पड़ेगा। कल अगर लखनऊ में डिग्री कॉलेज के छात्रों की कोई मांग हो और वे बसों पर पत्थर फेंकने लगें तो क्या उत्तर प्रदेश सरकार भी जरूरत से अधिक झुकेगी?

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    सीजेआई की बेंच ने की सुनवाई

    मामले की सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि भले ही कुछ गुमराह तत्व पत्थर फेंके, लेकिन युवाओं को शांत करने और उन्हें सही सलाह देने की जरूरत है।

    चीफ जस्टिस ने कहा, 'उन्हें सलाह और काउंसलिंग की जरूरत है। राज्य की ओर से कोई भी आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकता है तथा हिंसा को और भड़का सकता है। इससे हर हाल में बचा जाना चाहिए।' चीफ जस्टिस ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए और किसी घटना के होने पर संयम बरतना चाहिए।

    चीफ जस्टिस बोले- सावधानी से कदम उठाने होंगे

    वकील ने तर्क दिया कि अगर 500 लोग परिसर में घुस जाते तो कौन जानता है कि उनके पास हथियार था या नहीं? अगर वे गोली चला देते तो क्या होता? वे किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर मार्च नहीं कर रहे थे। वे रेलवे लाइन पर मार्च नहीं कर रहे थे।

    इस पर सीजेआई ने कहा कि हमें बहुत सावधानी से कदम उठाने होंगे, ताकि ये युवा हिंसा का रास्ता नहीं अपनाएं। बेहतर तरीका यह है कि उन्हें परामर्श दिया जाए और उनकी नाराजगी को शांत किया जाए। सबसे प्रभावी उपाय उनकी बात सुनना है। उनकी बात सुनिए और समझिए कि वे क्यों नारे लगा रहे हैं।

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