'संभल मस्जिद विवाद में हाई कोर्ट नहीं कर सकता था सुनवाई', सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
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'संभल मस्जिद विवाद में हाई कोर्ट नहीं कर सकता था सुनवाई', सुप्रीम कोर्ट
HighLights
जामा मस्जिद प्रबंधन समिति ने शीर्ष अदालत के दिसंबर, 2024 के आदेश किया दिया हवाला
इसमें देश की अदालतों को धार्मिक स्थलों को वापस पाने के मुकदमों पर आगे बढ़ने पर लगाई थी रोक
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को बताया गया कि संभल की अदालत द्वारा शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद में सर्वे के आदेश से जुड़े मामले में शीर्ष अदालत के 12 दिसंबर, 2024 के आदेश के मद्देनजर इलाहाबाद हाई कोर्ट आगे नहीं बढ़ सकता था।
इस महत्वपूर्ण आदेश में शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक देश की अदालतों को धार्मिक स्थलों, खासकर मस्जिदों और दरगाहों को वापस पाने की मांग करने वाले नए मुकदमों पर विचार करने और लंबित मामलों में कोई प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 'पूजा स्थल (विशेष प्रविधान) अधिनियम, 1991' के विभिन्न प्रविधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 2024 का उक्त आदेश दिया था।
1991 का कानून किसी भी पूजास्थल के धार्मिक चरित्र में बदलाव पर रोक लगाता है और कहता है कि किसी भी पूजास्थल का धार्मिक चरित्र वैसा ही बना रहे जैसा 15 अगस्त, 1947 को था। हालांकि, अयोध्या विवाद को इसके दायरे से बाहर रखा गया था।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को संभल की जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के 19 मई, 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की।
हाई कोर्ट ने शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद में संभल की अदालत द्वारा सर्वे के आदेश के विरुद्ध मस्जिद समिति की याचिका खारिज कर दी थी और दीवानी अदालत के सर्वे के निर्देश को सही ठहराया था।
शीर्ष अदालत में मस्जिद समिति के वकील हुजेफा अहमदी ने कहा कि हाई कोर्ट दिसंबर, 2024 के शीर्ष अदालत के आदेश को देखते हुए मामले में आगे नहीं बढ़ सकता था। हाई कोर्ट को इस आदेश के बारे में विशेष रूप से बताया गया था।
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1991 के कानून का मकसद ही यही था कि विवाद को बढ़ने न दिया जाए और उसे शुरुआत में ही खत्म कर दिया जाए। इस मामले में बहस चार अगस्त को भी जारी रहेगी।
गौरतलब है कि संभल की अदालत में दायर मुकदमे में दावा किया है कि यह मस्जिद मुगल बादशाह बाबर ने 1526 में हरिहर मंदिर को गिराकर बनवाई थी।