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तमिलनाडु: क्रिप्टो कंपनी में करवाता था इन्वेस्ट, स्कैम हुआ तो निवेशक वापस मांगने लगे पैसे; दबाव में युवक ने कर लिया सुसाइड

Updated: Tue, 01 Sep 2026 03:57 PM (IST)

तमिलनाडु में FQL क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के बाद निवेशकों के दबाव में आकर 25 वर्षीय युवक ने आत्महत्या कर ली।

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HighLights

  1. 25 वर्षीय युवक ने निवेशकों के दबाव में आत्महत्या की।

  2. FQL क्रिप्टोकरेंसी स्कीम में ₹25 करोड़ का घोटाला।

  3. पुलिस ने 21 गिरफ्तारियां की, 13 बैंक खाते फ्रीज।

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु में एक क्रिप्टो निवेश घोटाले के बाद दबाव में आकर एक 25 वर्षीय युवक ने आत्महत्या कर ली। FQL नामक स्कीम से जुड़े ए. राजा ने कथित तौर पर धोखाधड़ी के बाद पैसे डूबने के बाद निवेशक उस पर पैसे वापस करने का लगातार दबाव बना रहे थे।

राजा ने अपने परिचितों और अन्य लोगों को इस स्कीम में भारी मुनाफा कमाने का झांसा देकर निवेश कराया था, लेकिन ठगी का अहसास होने और पैसे डूबने के बाद निवेशकों के दबाव को न झेल पाने के कारण तनाव में आकर राजा ने डिंडीगुल जिले में आत्महत्या कर ली।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, राजा निवेशकों के भारी दबाव में था जिन्हें उसने खुद इस स्कीम में निवेश करने के लिए मनाया था। घटना के बाद अपना पैसा गंवाने वाले कई परिवार राजा के घर के बाहर जमा हो गए, इस उम्मीद में कि शायद उसने उनके निवेश की गई रकम कहीं सुरक्षित रखी हो।

क्या है FQL क्रिप्टोकरेंसी घोटाला?

पुलिस के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े में FQL इन्वेस्टमेंट ट्रेडिंग, FQL एक्सचेंज ऐप और VG इन्वेस्टमेंट ग्रुप सिंडिकेट शामिल हैं। यह ऑपरेशन पिछले सात महीनों से तमिलनाडु के मदुरै, डिंडीगुल, विरुधुनगर और शिवगंगा जिलों में धड़ल्ले से चल रहा था।

घोटाले का मुख्य आधार लोगों को कम समय में अमीर बनाने का लालच था। लोकल एजेंट लोगों को रोजाना रिटर्न का झांसा देते थे। वे दावा करते थे कि क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के जरिए महज 40 से 45 दिनों में उनका निवेश दोगुना हो जाएगा।

पुलिस का कहना है कि निवेश के लिए नकद, गूगल पे और UPI के जरिए पैसे इकट्ठा किए जाते थे। इकट्ठा किए गए फंड का कुछ हिस्सा कथित तौर पर टेथर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर FQL/VG वॉलेट में जमा किया जाता था।

पैसे निकालने पर लगी रोक

यह स्कैम तब सामने आई जब निवेशकों को एहसास हुआ कि वे अपनी ही रकम नहीं निकाल पा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, ऐप से पैसे निकालने की सभी कोशिशें नाकाम होने लगीं। बाद में निवेशकों से अतिरिक्त भुगतान की मांग की जाने लगी और अंततः ऐप को पूरी तरह से बंद कर दिया गया, जिससे निवेशकों का अकाउंट बैलेंस तक पहुंचना नामुमकिन हो गया।

इस घटना के बाद मदुरै जिले में शिकायतों की बाढ़ आ गई है। मेलूर और अलंगनल्लूर जैसे इलाकों के पीड़ित लगातार पुलिस के पास पहुंच रहे हैं।

मदुरै जिला कलेक्ट्रेट में विशेष अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो पीड़ितों की शिकायतें और उनके निवेश का विवरण दर्ज कर रहे हैं। शिकायतकर्ता अपने पैसे की वापसी और इस घोटाले के पीछे शामिल मास्टरमाइंड्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

घोटाले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक ने इस कथित FQL घोटाले से जुड़े सभी छह मामलों की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी है। DGP ने जांच EOW को सौंपने के पीछे पीड़ितों की बड़ी संख्या, नेटवर्क का दायरा, भारी वित्तीय नुकसान और USDT व Binance वॉलेट से जुड़े संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का हवाला दिया है।

6 मामले, 21 गिरफ्तारियां और 13 बैंक खाते फ्रीज

एनडीटीवी के अनुसार, अब तक इस मामले में तीन मदुरै में और एक-एक डिंडीगुल, विरुधुनगर व शिवगंगा में कुल छह एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। जांच के तहत पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों से जुड़े 13 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का प्रमोटर अमेरिका से लौटा एक व्यक्ति है। हमने उसे और उसके 20 अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है।

हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर डूबे हुए पैसों की कुल राशि का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अधिकारी ने बताया कि अब तक मिली शिकायतों के आधार पर यह अनुमान है कि लोगों को कम से कम 25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा सिर्फ शुरुआती शिकायतों पर आधारित है, फाइनल जांच में रकम और भी बड़ी हो सकती है।

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