तमिलनाडु चुनाव: झूल रही वोटों की तराजू, अल्पसंख्यक वोट करेंगे फैसला, क्या विजय बनेंगे एक्स फैक्टर?
तमिलनाडु में प्रमुख गठबंधन DMK और AIADMK के बीच वोटों का संतुलन झूल रहा है। युवा मतदाताओं और अल्पसंख्यकों के बीच अभिनेता विजय एक 'एक्स फैक्टर' के रूप ...और पढ़ें

तमिलनाडु चुनाव में विजय बनेंगे एक्स फैक्टर (फोटो-पीटीआई)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जितेंद्र शर्मा, मदुरै। छोटे-छोटे जातीय आधार वाले दलों के साथ प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गठबंधन एसपीए और राजग तमिलनाडु में ताल ठोक रहे हैं।
प्रत्यक्ष मुकाबला डीएमके और एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में दिखाई पड़ता है, लेकिन राजधानी चेन्नई से लेकर तमिलनाडु की सांस्कृतिक राजधानी मदुरै में मतदाताओं के बीच झूलती सोशल इंजीनियरिंग की वोटों की तराजू में एक्स फैक्टर के रूप में सतत दिखे विजय अल्पसंख्यक वोटों के लिहाज से ऐसे पासंग बन सकते हैं कि उनका वजन ही तय करेगा कि सत्ता किसकी झोली में जाने वाली है।
दरअसल, यहां तमिलनाडु के मानस की जनभावनाओं के साथ ही समीकरणों की समीक्षा आवश्यक है। हमारा विमर्श चेन्नई से शुरू हुआ और फिलहाल मदुरै तक चला। चाहे राज्य की राजधानी चेन्नई हो या टेंपल सिटी कहा जाने वाला मदुरै, मतदाताओं का समर्थक वर्ग समान रूप से बंटा हुआ है।
किसे मिलेगा जनता का समर्थन?
तमाम मतदाता इसलिए द्रमुक का समर्थन करते दिखे कि उन्हें एआईएडीएमके भी बेहतर विकल्प नहीं दिखती और विजय पर पूरा भरोसा करने में हिचकिचाते हैं। इसी तरह अपने-अपने तर्कों के साथ एआईएडीएमके का समर्थन करने वाले भी लगभग समानुपात में हैं।
मसलन, एमजीआर बस स्टैंड के सामने मीनाक्षी होटल पर चाय की चुस्की ले रहे शिव सीधा सा तर्क देते हैं कि डीएमके अच्छी है तो एक बार स्टालिन की संपत्ति की घोषणा को पढ़ लें। शिव डीएमके के वंशवाद से भी खिन्न दिखे।
खबरें और भी
मेलूर रोड पर मिले वेंकट रघु कहते हैं कि इससे पहले एआईएडीएमके की सरकार भी रह चुकी है। भ्रष्टाचार के आरोप उन पर भी लगे। कम से कम स्टालिन की योजनाएं तो बेहतर हैं।
जनता के बीच चल रही सत्ता के प्रभाव की तमाम चर्चाओं से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि डीएमके बेशक सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है, लेकिन जनता के बीच विमर्श में वह एआईएडीएमके के सामने खारिज या पूर्ण रूप से अस्वीकार्य भी नहीं है।
युवाओं का दिल जीत रहे विजय
इस जन विमर्श में सत्ता की तराजू डीएमके और एआईएडीएमके के बीच झूलती नजर आती है, लेकिन जैसी ही इसके साथ युवा मतदाताओं का मन टटोलते हुए पिछले चुनाव परिणाम के गणित पर गौर करें तो अभिनेता से नेता बने टीवीके प्रमुख विजय एक्स फैक्टर के रूप में उभरते दिखाई देंगे।
दरअसल, तमिलनाडु के हर कोने में युवाओं के बीच विजय की अच्छी-खासी लोकप्रियता दिख रही है। दोनों प्रमुख दलों को पसंद न करने वालों के लिए फिलहाल विजय एक विकल्प के तौर पर सामने आए हैं। उनका प्रभाव खास तौर पर अल्पसंख्यक मतदाताओं पर चल रहा है। चूंकि विजय ईसाई हैं, इसलिए पहले ईसाई मतदाताओं पर उनके प्रभाव का आंकलन तर्कसंगत होगा।
2021 विधानसभा चुनाव परिणाम
2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन को 45.4 प्रतिशत वोट मिला था, जबकि एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग छह प्रतिशत कम यानी 39.7 प्रतिशत वोट। अब नजर इस वोटों के अंतर पर है।
प्रदेश में अल्पसंख्यक वोट लगभग 12 प्रतिशत है। इसमें से 6.12 प्रतिशत ईसाई तो 5.86 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता। वैसे तो विजय हर वर्ग के युवा मतदाताओं में सेंध लगाते दिख रहे हैं, यदि सिर्फ ईसाई मतदाताओं का ही मजबूत समर्थन उन्हें मिल जाए तो तराजू अपने आप राजग गठबंधन की ओर झुक जाती है, क्योंकि पिछले चुनाव में ईसाई मत अधिकांश डीएमके को ही मिला था।
ऐसे में सिनेमा में क्लाइमेक्स दिखाते रहे विजय इस बार तमिलनाडु की राजनीति में भी कुछ क्लाइमेक्स की वजह बन सकते हैं। इसके अलावा दीपथून विवाद की धरती भी वही मदुरै है, जहां हिंदू धर्म की पताका हजारों मंदिरों पर फहरा रही है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह चुनावी मुद्दा भले ही न बना दिख रहा हो, लेकिन एमके स्टालिन ने मुस्लिम मतदाताओं की ओर झुकाव दिखाकर आस्थावान हिन्दू मतदाताओं के मन जरूर खट्टे किए हैं।
मीनाक्षी अम्मा मंदिर के पास खड़े राजशेखरन के परिवार ने स्पष्ट कहा कि एमके स्टालिन को दोनों पक्षों की आस्था का ध्यान रखना चाहिए था। हालांकि इन्होंने भी अपना समर्थन विजय के प्रति व्यक्त किया।
यह भी पढ़ें- कौन हैं लीमा रोज मार्टिन, तमिलनाडु चुनाव की सबसे अमीर उम्मीदवार? 1000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति