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फ्लाईदुबई घटना का दूसरा पहलू... घायल कैप्टन स्मित से मिलने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा था परिवार

Published: Mon, 05 Oct 2026 08:12 AM (IST)

30 सितंबर, 2026 को एक आतंकी हमले को नाकाम करने के बाद घायल हुए कैप्टन स्मित के माता-पिता को अपने ...और पढ़ें

स्मित के पिता ने बताई 30 सितंबर की घटना की पूरी कहानी।

स्मित के पिता ने बताई 30 सितंबर की घटना की पूरी कहानी।

HighLights

  1. आतंकी हमले में घायल कैप्टन स्मित के परिवार का संघर्ष।

  2. प्रधानमंत्री मोदी ने परिवार को मदद का आश्वासन दिया।

  3. कैप्टन स्मित की अबू धाबी में चल रही है रिकवरी।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। 30 सितंबर, 2026 ये वो तारीख है जिसे एक आतंकी हमले को नाकाम करने वाले दिन के तौर पर याद किया जाएगा लेकिन कैप्टन स्मित के माता-पिता के लिए वह काली रात थी जब उनका एकमात्र बच्चा सऊदी अरब के एक सैन्य अस्पताल में अकेला पड़ा था। उसके शरीर पर गहरे घाव थे और इलाज चल रहा था।

एक तरफ पूरी दुनिया उन्हें रियल हीरो बना चुकी थी तो वहीं दूसरी तरफ उनके माता-पिता अभी भी उन शुरुआती भयानक घंटों की अनिश्चितता में जी रहे थे। उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इस बात का कोई आश्वासन नहीं कि उनका बेटा जीवित रहेगा। उससे मिलने के लिए फ्लाइट ढूंढने की कोशिश कर रहे थे। प्रार्थना करने के अलावा करने को कुछ नहीं बचा था। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे ही वे फ्लाइट में चढ़ने में कामयाब हुए।

पीएम मोदी ने परिवार को दिया आश्वासन

एक अंग्रेजी अखबार के साथ हुई बातचीत में कैप्टन स्मित के पिता उपेंद्र ने कहा, "मैं मुंबई में विमान में था जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन किया। उन्होंने मुझे चिंता न करने के लिए कहा और मुझसे पूछा कि मैं क्या चाहता हूं। उन्होंने कहा, दिन खत्म होने से पहले मैं तुम्हें उनसे बात कराऊंगा।"

स्मित को सऊदी अरब से अबू धाबी लाया गया

जब तक स्मित का परिवार दुबई पहुंचा, तब तक एक और घटनाक्रम सामने आना शुरू हो चुका था। भारतीय दूतावास ने स्मिट की पत्नी सोनल से संपर्क किया था और उन्हें सूचित किया था कि कैप्टन स्मित को दुबई शेख के निजी विमान से अबू धाबी के सैन्य अस्पताल ले जाया गया है। परिवार अबू धाबी के लिए रवाना हुआ। अब राहत थी, लेकिन अभी शांति नहीं थी क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि स्मित को कितनी गहरी चोट लगी है।

चोटें गहरी और भयानक दर्द

स्मित के पिता कहते हैं, "अस्पताल में कल की यात्रा के बाद मैं अब कुछ हद तक आराम के स्तर पर हूं और विश्वास करता हूं कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। स्मित ने मुझसे यह भी कहा कि मुझे कुछ समय दीजिए और मैं ठीक हो जाऊंगा।" उनका बेटा लगभग रातोंरात साहस का एक प्रतीक बन गया है लेकिन उनके लिए सुर्खियों और प्रशंसा के बावजूद वह वही है जो वह हमेशा से था। उनका एकमात्र बच्चा।

उपेन्द्र ने बताया, "चोटें गहरी हैं और वह भयानक दर्द में हैं लेकिन जब दूसरे देशों के नेता उनसे बात करते हैं तो वह खुद को संभालते हैं और शांति के साथ जवाब देते हैं।" उनका कहना है, "उनके परिवार के रूप में हम जानते हैं कि उस शांति के पीछे क्या छिपा है। तनाव बहुत अधिक है लेकिन जिस भगवान ने उन्हें बचाया वह उनके आगे के जीवन की दिशा भी तय करेगा। फिलहाल हम 100% सकारात्मक हैं कि भगवान वही करेंगे जो उनके लिए सबसे अच्छा होगा।"

स्मित की रिकवरी में लगेगा समय

अस्पताल ने परिवार से कहा है कि रिकवरी जल्दी नहीं होगी। उनके पिता कहते हैं, "अस्पताल के प्रमुख ने कहा कि उन्हें कम से कम आठ दिन और चाहिए। उसके बाद वे उनकी छुट्टी की तारीख की समीक्षा करेंगे। घाव बहुत गहरे हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें घर भेजने से पहले वह पूरी तरह से ठीक हो जाएं लेकिन इलाज शानदार रहा है।"

फिर भी उपेन्द्र के लिए एक और सवाल है जो उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। पिता ने कहा, "जो कुछ हुआ उसने हमें चौंका दिया लेकिन दूसरों को पहले रखने की उसकी भावना ने उसे वह करने के लिए मजबूर किया, जो उसने किया। अगर हमारा कोई पारिवारिक कार्यक्रम है और अगर उसे किसी अन्य पायलट को सलाह देने या पायलट परीक्षण करने के लिए जाना है तो वह उसे प्राथमिकता देगा और परिवार को समारोह को एक या दो घंटे आगे बढ़ाने के लिए कहेगा।"

परिवार नहीं चाहता था कि स्मित पायलट बने

उपेन्द्र का मानना है कि किसी और को पहले स्थान पर रखने की प्रवृत्ति, स्मित के पायलट बनने से बहुत पहले से थी। परिवार नहीं चाहता था कि स्मित पायलट बने। उन्हें उम्मीद थी कि स्मित पारिवारिक व्यवसाय संभालेगा।

उनके दादा ने टेक्सटाइल प्रिंटिंग कारखाने की स्थापना की थी और उपेन्द्र और उनके भाई ने मिलकर इसे चलाना शुरू किया। जबकि स्मित ने अपने चचेरे भाई की तरह SASMIRA में पढ़ाई की। अपना कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की और फिर अपने पिता के साथ कारखाने में समय बिताना शुरू कर दिया।

परिवार के बिजनेस से कुछ अलग करना चाहते थे स्मित

स्मित के पिता कहते हैं, "उसने मुझसे कहा कि हम हर दिन जितना कमाते हैं उससे अधिक खर्च करते हैं। मैंने उनसे कहा कि यह व्यवसाय इसी तरह चलता है। पीढ़ियों से ऐसा ही चल रहा है लेकिन वह कुछ चीजें बदलना चाहते था। उसने मुझसे कुछ ऐसा करने की अनुमति मांगी जो वह करना चाहता था। उसने कहा कि मेरा एक सपना है जिसे मैं पूरा करना चाहता हूं।" वह सपना था उड़ान भरने का।

उपेंद्र मे बताया, "मैंने उससे कहा कि क्या तुम बहक रहे हो? एक-एक पैसा मेहनत की कमाई है। मैंने उससे कहा कि अगर वह पैसे बर्बाद न करने का वादा करे तो मैं उसे जाने दूंगा।" उपेन्द्र का एक बेटा है। उनके भाई का एक बेटा भी था। स्मित का चचेरा भाई भी पायलट बनना चाहता था।

दोनों परिवारों ने अपने बच्चों को समझाया और कहा, "यह बहुत बड़ा खर्च है। हमने उनसे कहा कि वे पैसे बर्बाद न करें।" हालांकि उन्होंने ऐसा नहीं किया। स्मित अपने प्रशिक्षण के लिए न्यूजीलैंड गए और 10 महीने में इसे पूरा किया।

फिर उनके मेंटर का एक फोन आया और कहा कि अगर परिवार अतिरिक्त 26 लाख रुपये लगा सकता है तो स्मित बोइंग 737 पर टाइप-रेटिंग प्राप्त कर सकता है। स्मित ने लंदन जाकर बोइंग विमान का प्रशिक्षण लिया। इसके तुरंत बाद वह स्पाइसजेट में शामिल हो गए।

स्पाइसजेट छोड़ फ्लाईदुबई में शामिल हुए स्मित

2022 में स्मित को फ्लाईदुबई से एक इंटरव्यू का कॉल आया। उन्हें नौकरी मिल गई और अंततः वह सोनल के साथ दुबई चले गए। दम्पति अपने माता-पिता को भी करीब चाहते थे। पिछले चार वर्षों से उपेन्द्र और उनकी पत्नी ने अपना जीवन मुंबई और दुबई के बीच आते-जाते बिताया है। वो छह महीने मुंबई में तो छह महीने दुबई में बिताते हैं।

शुरुआती घंटे

उपेंद्र ने कहा कि वह वैसे भी 25 अक्टूबर को दुबई जाने वाले थे। एक रात के लिए सोनल इस अनिश्चितता के साथ अकेली थी कि उसके पति के साथ क्या हुआ था। शुरुआती घंटे सबसे कठिन थे क्योंकि बहुत कम निश्चितता थी। क्या हुआ था इसकी कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं थी, यह जानने का कोई तरीका नहीं था कि अगले कुछ घंटे क्या लेकर आएंगे।

और फिर उन घंटों में कहीं न कहीं परिवार ने एक निर्णय लिया। उपेंद्र ने कहा, "हमने इस घटना के बारे में बात नहीं करने का फैसला किया।" अभी के लिए वे 30 सितंबर से आगे देखना चाहते हैं। उस दिन जब स्मित अस्पताल से बाहर आएगा। वो दिन जब उसके घाव भर जाएंगे।

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