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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 02, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

क्लाइमेट इमरजेंसी पर जानें क्या है भारतीयों की सोच, इन उपाय और तरीकों पर जताया भरोसा

By Ashish PandeyEdited By:
Published: Tue, 02 Nov 2021 04:25 PM (IST)Updated: Tue, 02 Nov 2021 04:37 PM (IST)

क्लाइमेट चेंज का असर हमारे जीवन के हर क्षेत्र में हो रहा है चाहें वह कृषि का क्षेत्र हो या ...और पढ़ें

दुनिया भर के लोग ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी चिंताओं से परेशान है।
दुनिया भर के लोग ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी चिंताओं से परेशान है।

नई दिल्ली, जेएनएन। दुनिया भर के लोग ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी चिंताओं से परेशान है। विश्व भर में इससे निपटने के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जा रहे हैं। हालिया एक सर्वे में सामने आया कि भारतीय भी मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज से मुकाबला करने के लिए सभी आवश्यक कदमों को शीघ्र उठाए जाने की आवश्यकता है। क्लाइमेट चेंज का असर हमारे जीवन के हर क्षेत्र में हो रहा है चाहें वह कृषि का क्षेत्र हो या सेहत की बात। यही नहीं भारत में 59 फीसद लोग इस मत से समानता रखते हैं कि वैश्विक क्लाइमेट इमरजेंसी का दौर है। एनडीपी और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक साझा सर्वे में यह बात सामने आई है।

सबसे बड़ा संकट है क्लाइमेट चेंज

रिपोर्ट के अनुसार भारतीयों ने इससे निपटने के लिए हरसंभव बात को अपनाने पर बल दिया है। इस सर्वे में शामिल हुए देशों में 64 फीसदी लोगों ने क्लाइमेट चेंज को सबसे बड़ा संकट माना है। सर्वे में शामिल हुए 50 देशों में से ब्रिटेन और इटली के सबसे अधिक लोग मानते है कि यह दौर वैश्विक क्लाइमेट इमरजेंसी का है। रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन और इटली के 81 फीसद लोग इस मत से सहमत है। इसके बाद क्रमश: जापान और फ्रांस का नंबर आता है।

यूएनडीपी और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 53 फीसद भारतीय कहते हैं कि क्लाइमेट चेंज से मुकाबला करने के लिए सभी आवश्यक कदमों को शीघ्र उठाए जाने की आवश्यकता है। भारत में 43 फीसद लोगों ने माना कि ग्रीन इकोनॉमी और जॉब्स में अधिक निवेश किए जाने की आवश्यकता है।

बढ़ाए जाए इलेक्ट्रिक कार और बस

भारत में 37 फीसद लड़कियों और महिलाओं का मानना है कि इलेक्ट्रिक कार और बस या साइकिलों को बढ़ावा देने की जरूरत है जबकि 49 फीसदी पुरुष और लड़कों का इस बात को समर्थन मिला। इसके अलावा ग्रीन बिजनेस और जॉब्स में निवेश को 38 फीसद लड़कियों और महिलाओं का समर्थन मिला तो 48 फीसद पुरुष और लड़कों ने इस पक्ष में अपना मत दिया।

यदि उम्र के लिहाज से लोगों के मंतव्य को देखें तो छोटी उम्र के युवा जलवायु परिवर्तन को एक बड़ा संकट मानते हैं।

14 से 18 वर्ष के 69 फीसदी युवा मानते हैं कि जो समय चल रहा है वो जलवायु आपातकाल है। इसी तरह 18 से 35 वर्ष के 65 फीसदी युवा इस बात से सहमत हैं। वहीं 36 से 59 वर्ष के 66 फीसदी लोग इसे आपातकाल मानते हैं, जबकि 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के केवल 58 फीसदी लोग उनसे सहमत हैं। भारत में 18 साल से कम के 67 प्रतिशत युवा इस बात को मानते हैं कि वैश्विक आपातकाल का दौर आ गया है।

अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को भारत समेत इन देशों का मिला साथ

स्वच्छ, अक्षय ऊर्जा क्लाइमेट चेंज का मुकाबला करने में काफी प्रभावी है। सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि उनका देश एनर्जी सेक्टर में क्या करें तो अधिकतर लोगों ने सौर ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा और पवन ऊर्जा के विकल्प को सर्वोत्तम माना। रिपोर्ट के मुताबिक 44 प्रतिशत भारतीयों ने इस विकल्प को अपनाने को लेकर हामी भरी। वहीं दस देश जिनके यहां बिजली/हीटिंग सेक्टर से अधिक उत्सर्जन होता है उनमें आठ देशों ने इस विकल्प को अपनाने को प्राथमिकता दी।

दुनिया भर में इन क्लाइमेट नीतियों को मिला लोगों को समर्थन

दुनिया भर में क्लाइमेट चेंज से निपटने के लिए कई तरह की नीतियां चल रही है। पर सर्वे में कुछ नीतियों को लोगों का सबसे अधिक समर्थन मिला है। जमीन और जंगलों का संरक्षण (54 फीसद), सौर, हवा और रिन्यूएबल ऊर्जा (53 फीसद), क्लाइमेट फ्रेंडली फार्मिंग तकनीक (52 फीसद), ग्रीन बिजनेस और जॉब्स में अधिक धन का निवेश करना (50 फीसद), इलेक्ट्रिक कार और बस या साइकिल का अधिक इस्तेमाल (48 फीसद), समुद्रों को स्वच्छ रखना (45 फीसद), प्रकृति का संरक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना ताकि लोगों की जिंदगी और आजीविक सुरक्षित रह सके (45 फीसद), आपदाओं से निपटने के लिए वार्निंग सिस्टम को इंस्टाल करना (45 फीसद), फूड वेस्ट को कम करना (43 फीसद), शहरों और ग्रामीण समुदायों की डिजाइन और प्लानिंग को सुधारना (38 फीसद), प्रदूषित करने वाले बर्निंग फ्यूल को रोकना (38 फीसद) आदि को लोगों ने अधिक बेहतर माना है।

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