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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 15, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    भारत-चीन सीमा विवाद के बीच सरकार का बड़ा फैसला, बढ़ाई जाएगी सुरक्षा; तैयार होगा पुख्ता निगरानी तंत्र

    By AgencyEdited By: Anurag Gupta
    Updated: Wed, 15 Feb 2023 08:12 PM (IST)

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। जिनमें भारत-चीन सीमा ...और पढ़ें

    भारत-चीन सीमा विवाद के बीच सरकार का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)
    भारत-चीन सीमा विवाद के बीच सरकार का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)

    नीलू रंजन, नई दिल्ली। चीन की ओर से सीमा पर घुसपैठ की आशंका से निपटने के लिए सरकार पुख्ता निगरानी तंत्र तैयार करने में जुट गई है। इसके लिए कैबिनेट ने चीन के लगे सीमावर्ती जिलों में वाइब्रेंट विलेज योजना को हरी झंडी देने के साथ ही आईटीबीपी में सात नए बटालियन तैयार करने और उनके लिए सेक्टोरल हेडक्वार्टर बनाने को मंजूरी दे दी है।

    पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन से लगी सीमा पर बीते कुछ सालों के दौरान अतिक्रमण की घटनाओं को लेकर लगातार तनातनी रही है और भारतीय सुरक्षा बलों ने चीनी मसूंबो को नाकाम किया है। सरकार की ताजा पहल सीमा पर मुस्तैदी और सुरक्षा प्रबंध मजबूत कर अतिक्रमण के मंसूबों की ऐसी गुंजाइशों को थामने के लिए है। साथ ही वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से सीमावर्ती गांवों से पलायन रोकने और पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

    वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के पहले चरण को मिली मंजूरी

    सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा भी कि इससे सीमा की सुरक्षा में भी सुधार होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 4800 करोड़ रुपये की लागत से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के पहले चरण को मंजूरी दे दी गई। पहले चरण में कुल 663 गांवों को शामिल किया गया है।

    अनुराग ठाकुर ने बताया कि अगले तीन सालों में पूरी होने वाली इस योजना के तहत 4800 करोड़ रुपये में 2500 करोड़ रुपये सड़कों के निर्माण पर खर्च किया जाएगा। इससे इन सीमावर्ती गांवों में आवागमन आसान होगा। ये गांव हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में फैले हैं। बाकि 2300 करोड़ रुपये की राशि को इन गांवों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ ही आजीविका के अवसरों के निर्माण पर खर्च किया जाएगा।

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    स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेंटर भी बनाने की योजना

    ठाकुर के अनुसार, बिजली की 24 घंटे आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सौर व पवन ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही इन्हें मोबाइल और इंटरनेट की कनेक्टिविटी के साथ भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इन गावों में पर्यटक केंद्र, बहुउद्देशीय सेंटर और स्वास्थ्य व वेलनेस सेंटर भी बनाए जाएंगे। जाहिर है इससे इन सुदूर गांवों से पलायन रोकने के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    जाहिर है इन गांवों में गतिविधियां बढ़ने से सीमा की निगरानी भी संभव हो सकेगी। इन चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 19 जिले और 46 ब्लाक चीन की सीमा से लगे हैं, जिनमें कुल 2966 गांव आते हैं। व्राइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अगले चरण में बाकि गांवों को कवर किया जाएगा। सीमावर्ती गांवों के वाइब्रेंट बनाने के साथ ही कैबिनेट ने आईटीबीपी के सात नए बटालियन के गठन की मंजूरी दी है। नए बटालियन को 47 नए बोर्डर आउटपोस्ट और 12 स्टेजिंग कैंप पर तैनात किया जाएगा। चीन सीमा पर निगरानी गैप को भरने के लिए 47 नए बोर्डर आउटपोस्ट और 12 स्टेजिंग कैंप बनाने का फैसला जनवरी 2020 में किया गया था।

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    जाहिर है नए बटालियन के गठन से ये आउटपोस्ट और कैंप पर तैनाती शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही आईटीबीपी के लिए अलग से सेक्टर हेडक्वार्टर बनाने का भी फैसला किया गया है। नए बटालियन और सेक्टर हेडक्वार्टर के लिए कुल 9400 पद सृजित किये गए हैं, जिनके लिए जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

    सिंकुला टनल निर्माण को मंजूरी

    अनुराग ठाकुर ने कहा कि हेडक्वार्टर और जवानों के रहने के लिए घरों के निर्माण पर 1808 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वहीं नए जवानों और कर्मचारियों के वेतन पर सालाना 964 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कैबिनेट ने लद्दाख में सीमावर्ती इलाकों में सामरिक आवगमन के लिहाज से सिंकुला टनल के निर्माण को भी मंजूरी दी है। 4.1 किमी लंबे इस टनल के जरिए लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्र को परिवहन से जोड़ने में मदद मिलेगी ही साथ ही सैनिकों के लिए इसके जरिए सीमा पर रसद और संसाधन कम समय में पहुंचाया जा सकेगा।

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