मिशन 2027: सपा के साथ गठबंधन पर कांग्रेस में असमंजस, यूपी चुनाव की क्या है रणनीति?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस के गठबंधन में कांग्रेस ने हर जिले में अपना प्रत्याशी उतारने का प्रस्ताव रखा है। ...और पढ़ें

अखिलेश के साथ गठबंधन पर कांग्रेस में असमंजस
HighLights
कांग्रेस ने हर जिले में प्रत्याशी उतारने का प्रस्ताव दिया।
गठबंधन में सीमित सीटों से संगठन निष्क्रिय होने की चिंता।
सपा ने कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर लगभग सहमति जताई।
जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। यह लगभग तय है कि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव सपा और कांग्रेस फिर से मिलकर लड़ेंगे। यह भी बात रह-रह कर सामने आ रही है कि प्रदेश कांग्रेस में तमाम नेता और कार्यकर्ता गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं। उनकी चिंता यही है कि गठबंधन में सीमित सीटें मिलने से उन जिलों में पार्टी का संगठन सुस्त या निष्क्रिय हो जाता है, जहां उनका प्रत्याशी नहीं होता।
शायद कार्यकर्ताओं की इस चिंता से अब पार्टी हाईकमान भी सहमत है, इसीलिए इस बार गठबंधन सहयोगी समाजवादी पार्टी को प्रस्ताव दिया है कि सीटों की संख्या भले ही बढ़-घट जाए, लेकिन कांग्रेस चाहती है कि प्रदेश के हर जिले में कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर एक प्रत्याशी अवश्य हो। बताया गया है कि इस पर लगभग सहमति भी बन चुकी है।
तीन दशक से हाशिए पर कांग्रेस
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस तीन दशकों से हाशिए पर है। 2017 में पार्टी कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को आधार तब मिला, जब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) ने रणनीति का मोर्चा संभाला। यात्राएं निकलीं, राहुल गांधी की खाट सभाएं हुईं, फॉर्म भरवाकर आम जनता से अपेक्षाएं मांगी गईं। माहौल बनता दिख ही रहा था कि दिल्ली में हाईकमान ने तय कर लिया कि सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा जाएगा।
सपा ने कांग्रेस को लड़ने के लिए 105 सीटें दीं, जिसमें से सात सीटों पर सपा के प्रत्याशी कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर लड़े। इसके अलावा नौ सीटों पर फ्रेंडली फाइट हुई और कांग्रेस के प्रत्याशियों की संख्या 114 हो गई। हालांकि, चुनाव परिणामों में इसका कोई लाभ नहीं दिखा और कांग्रेस 2012 के मुकाबले 21 से घटकर सात पर आ गई।
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तब समीक्षा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यही पीड़ा सामने आई कि हर जिले में पार्टी प्रत्याशी नहीं था, इसलिए संगठन पूरे प्रदेश में सक्रिय नहीं हो पाया। चूंकि, कांग्रेस और सपा, दोनों ही दलों को लगता है कि अकेले भाजपा से मुकाबला संभव नहीं है, इसलिए 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों ने गठबंधन किया और फिर हाथ मिलाकर मैदान में उतरने को तैयार हैं।
कांग्रेस को कितनी सीटें?
कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि अभी शुरुआती बातचीत में सपा ने कांग्रेस को 70 सीटें देने पर सहमति जताई है, जबकि कांग्रेस 150 मांग रही है, लेकिन उसे सौ सीटें मिलने की आस है। खास बात यह है कि सपा को प्रस्ताव यह दिया गया है कि सीटों की संख्या उसी हिसाब से निर्धारित की जाएं कि हर जिले में कम से कम एक प्रत्याशी कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर अवश्यक लड़े।
यदि कहीं सपा का दावेदार मजबूत स्थिति में हो तो वह कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर भी लड़ सकता है। पार्टी नेताओं के अनुसार, 2017 में कांग्रेस प्रदेश के 75 में से सिर्फ 44 जिलों की सीटों पर ही लड़ पाई थी। 31 जिलों में एक भी सीट उसे लड़ने के लिए नहीं मिली थी।