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    भारत दौरे पर पहुंचे मार्को रूबियो, 14 साल बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता दौरा

    Updated: Sat, 23 May 2026 08:38 AM (IST)

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो चार दिवसीय भारत दौरे के शुरुआती पड़ाव में कोलकाता पहुंचे और मदर हाउस का दौरा किया। ...और पढ़ें

    भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो(फोटो: रॉयटर्स)

    भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो(फोटो: रॉयटर्स)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार सुबह कोलकाता पहुंचे। यह पिछले 14 वर्षों में किसी शीर्ष अमेरिकी राजनयिक की कोलकाता की पहली यात्रा है। यह छोटा दौड़ा उनके चार दिवसीय उच्च-स्तरीय भारत दौरे का शुरुआती पड़ाव है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना और क्षेत्रीय साझेदारी को मजबूत करना है।

    कोलकाता पहुंचने के तुरंत बाद, रूबियो ने मध्य कोलकाता स्थित मदर हाउस और उससे जुड़े चिल्ड्रन्स होम का दौरा किया। मदर हाउस सेंट टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी का वैश्विक मुख्यालय है। उनकी इस यात्रा को सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। रूबियो से पहले, मई 2012 में हिलेरी क्लिंटन कोलकाता आने वाली आखिरी अमेरिकी विदेश मंत्री थीं।

    यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक समानताएं बढ़ रही हैं। रूबियो की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    भारत-अमेरिका संबंधों को मिलेगा नया आयाम

    भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कोलकाता हवाई अड्डे पर रुबियो का स्वागत किया। गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी देते हुए बताया कि रूबियो नई दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ भारतीय नेताओं के साथ चर्चा करेंगे।

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    गोर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो कोलकाता उतर चुके हैं। यह उनकी पहली भारत यात्रा है। आज हम नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। अगले कुछ दिनों में व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, क्वाड और कई अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी।

    अमेरिकी राजदूत के अनुसार, आगामी बैठकों में मुख्य रूप से रक्षा साझेदारी, उन्नत प्रौद्योगिकियों, व्यापार संबंधों और क्वाड ढांचे के तहत सहयोग सहित प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    ऊर्जा सुरक्षा और क्रूड ऑयल पर खास फोकस

    इस महत्वपूर्ण यात्रा की पृष्ठभूमि तैयार करते हुए, मार्को रूबियो ने गुरुवार को ही भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी को व्यापक स्तर पर बढ़ाने की वाशिंगटन की उत्सुकता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका भारत को उतनी ऊर्जा की आपूर्ति करने के लिए तैयार है, जितनी नई दिल्ली खरीदना चाहती है।

    स्वीडन और भारत के लिए रवाना होने से पहले मियामी में मीडिया से बातचीत करते हुए रूबियो ने संकेत दिया था कि ऊर्जा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका पहले ही भारतीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बातचीत शुरू कर चुका है। अमेरिका में तेल और गैस उत्पादन के ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने के कारण इस दिशा में तेजी आई है।

    उन्होंने बताया कि वाशिंगटन भारत के विविध ऊर्जा विकल्पों में अधिक गहराई से शामिल होना चाहता है। साथ ही, उन्होंने वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रावधानों से जुड़ी सहयोगी व्यवस्थाओं की संभावनाओं का भी संकेत दिया। इन वैश्विक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दोनों लोकतंत्रों के बीच संबंधों को मजबूत बताते हुए, रूबियो ने भारत को एक महान भागीदार करार दिया।

    क्वाड की अहम बैठक में लेंगे हिस्सा

    अमेरिकी विदेश मंत्री 23 से 26 मई तक भारत के इस आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। उनके व्यस्त कार्यक्रम में कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली शामिल हैं। रूबियो अपनी इस यात्रा के दौरान 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शामिल होंगे।

    इंडो-पैसिफिक की उभरती सुरक्षा स्थिति और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर विचार-विमर्श करने के लिए भारत इस अहम बैठक की मेजबानी कर रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में होने वाली इस रणनीतिक बैठक में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल होंगे।

    विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस रणनीतिक बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भाग लेंगे। इसके अलावा, ये विदेशी गणमान्य व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ आमने-सामने की द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए क्वाड के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, मंत्री 1 जुलाई, 2025 को वाशिंगटन डीसी में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे।