'मेरे दिल का बोझ उतर गया...', तरुण तेजपाल को दोषी ठहराए जाने पर बोलीं पीड़िता की मां
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के गोवा दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल जेल की सजा सुनाई है। ...और पढ़ें

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया गया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2013 के गोवा यौन उत्पीडन मामले में तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया गया। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने सेशंस कोर्ट के 2021 के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी सिद्ध किया। साथ ही उसे 10 साल जेल की सजा सुनाई।
इस फैसले पर राहत जताते हुए पीड़िता की मां कहा कि सालों चली कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले ने उनके दिल का भोझ उतार दिया है। उन्होंने कहा, 'मेरे मन से एक बहुत बड़ा बोझ हट गया है। ये साल बहुत दर्दनाक थे। इतने सालों तक हिम्मत बनाए रखने के लिए बहुत ताकत की जरूरत पड़ी।'
अदालत के फैसले पर क्या बोलीं पीड़िता की मां
उन्होंने आगे कहा, 'मैं गोवा सरकार और उनके वकीलों का शुक्रिया अदा करती हूं जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और न्याय के लिए लड़ाई लड़ी।' गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 62 साल के तेजपाल को 2013 में अपनी एक सहयोगी के साथ रेप का दोषी ठहराया। कोर्ट ने गोवा सेशंस कोर्ट के उस फ़ैसले को पलट दिया जिसमें उन्हें बरी कर दिया गया था।
तेजपाल ने कहा कि वह बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और दावा किया कि यह आदेश गलत है। इससे पहले आज कोर्ट में तेजपाल ने कहा कि उन्हें लगता है कि 'वह खुद पीड़ित हैं' और उन्होंने नरमी बरतने की अपील की।
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तेजपाल ने फैसले से पहले क्या कहा?
तेजपाल ने कोर्ट से कहा, 'मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना है कि मैं पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है और इसके अलावा कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं। कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें। बाकी सभी तथ्य रिकॉर्ड पर रखे गए हैं।'
पीड़िता (जिसकी पहचान कानून के अनुसार उजागर नहीं की गई है) ने कहा कि तेजपाल ने 7 और 8 नवंबर 2013 को मैगजीन द्वारा आयोजित सालाना कार्यक्रम 'थिंकफेस्ट' के दौरान होटल की लिफ्ट में उनके साथ दो बार बदसलूकी की थी। उसी साल 30 नवंबर को तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया था।
'नो मीन्स नो', कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल की दलील
शुरुआत में तेजपाल ने इस घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि यह 'हालात को बुरी तरह गलत समझने' का नतीजा था। लेकिन आरोप तय होने के बाद, उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक बदले की भावना का शिकार हुए हैं।
गोवा की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि तेजपाल 'ना को ना नहीं मान पाए' और उन्होंने कोर्ट से तेजपाल को ज्यादा से ज्यादा सजा देने की अपील की।
मेहता ने कहा, 'पीड़िता उनकी बेटी की उम्र की थी, फिर भी उन्होंने अपराध किया। वह पिता समान थे, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। एक मिसाल कायम की जानी चाहिए।
पीड़िता ने मना किया था, लेकिन वह अगले दो दिनों तक भी आगे बढ़ते रहे। इस कोर्ट को समाज में एक साफ़ संदेश देना चाहिए कि जब कोई लड़की 'ना' कहती है, तो उसका मतलब 'ना' ही होता है। 'ना' का मतलब 'ना' ही है।"