धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखी 2 मांगें, खरगे बोले- 'यह अंत नहीं'
नीट पेपर लीक विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। विपक्ष ने इसे छात्रों की जीत बताया और प्रधानमंत्री मोदी से मा ...और पढ़ें
-1784978668764_m.webp)
राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखी 2 मांगें (फोटो-पीटीआई)
HighLights
धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक विवाद पर इस्तीफा दिया।
विपक्ष ने छात्रों की आवाज की जीत बताया।
पीएम मोदी से माफी और सख्त कार्रवाई की मांग।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। नीट पेपर लीक के बाद से ही देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा था, इसे देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने आज शनिवार, 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया।
कॉकरोच जनता पार्टी समेत देशभर में छात्रों ने धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन किया। प्रधान के इस्तीफे के बाद मल्लिकार्जुन खरगे, अरविंद केजरीवाल और शरद पवार समेत कई नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।
राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखी 2 मांगें
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का रिएक्शन सामने आया है। राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को एजुकेशन सिस्टम को नया आकार देने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम बताया है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'देश भर के स्टूडेंट्स को बहुत-बहुत बधाई। हमें आप सभी पर गर्व है। हर उस नौजवान, हर उस स्टूडेंट को दिल से बधाई जो डेमोक्रेसी, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे और डटे रहे।'
राहुल गांधी ने आगे कहा, '2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री को स्टूडेंट्स और भारत के भविष्य का सम्मान करते हुए माफी मांगनी चाहिए और स्टूडेंट्स के खिलाफ हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।'
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर हमला करते हुए आगे कहा, 'समाज के दूसरे तबकों के लिए किसान, मजदूर, गरीब, हर वह इंसान जिसे इस सरकार ने दबाया और कुचला है—असली हिम्मत अपनी इज्जत के लिए संवैधानिक तरीके से डटे रहने में है। इस सरकार को हटाने का समय आ गया है।'
खबरें और भी
-1784978837345.jpg)
'अहंकारी सत्ता के दरवाजे तक पहुंची जनता की आवाज'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, भारत के 'छात्रों की आवाज' आखिरकार उस अहंकारी सत्ता के दरवाजे तक पहुंच ही गई है। यह हमारे उन लाखों युवाओं की जीत है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए देश भर की सड़कों पर अपनी आवाज उठाई।'
खरगे ने आगे लिखा, 'यह सच की जीत है और पीएम मोदी की जिद की हार है। यह उन सभी परिवारों की जीत है जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया, क्योंकि यह सरकार भ्रष्ट है। यह एकजुट विपक्ष की जीत है, जिसने छात्रों के हित में संसद से लेकर सड़कों तक अपनी आवाज उठाई।'
खरगे ने आगे लिखा, 'अब पीएम मोदी की बारी है कि वे हमारी युवा पीढ़ी से माफी मांगें और उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें जिन्होंने उन पर लाठियां और पैलेट गन चलाईं।'
पीएम मोदी की माफी का इंतजार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर लिखा, 'अयोग्य, असंवेदनशील और अहंकारी मंत्री प्रधान को आखिरकार इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। युवाओं के लगातार दबाव के कारण ही प्रधानमंत्री को उन्हें राजनीतिक संरक्षण देना बंद करना पड़ा।'
जयराम रमेश ने आगे लिखा, 'यह उस पीढ़ी की जीत है जो एक अन्यायपूर्ण और भ्रष्ट व्यवस्था से जूझते-जूझते थक चुकी है, और उस विपक्ष की भी जीत है जिसने छात्रों के साथ मजबूत एकता और एकजुटता दिखाई है।'
कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, 'बात यहीं खत्म नहीं होती। हम अभी भी प्रधानमंत्री से अपने छात्रों के लिए माफी की उम्मीद कर रहे हैं। और हम उन लोगों से जवाबदेही की मांग करते हैं जिन्होंने छात्रों पर अत्याचार किए, जिसमें पैलेट गन का इस्तेमाल भी शामिल है।'
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार क्यों इस्तीफा दिया। जयराम रमेश ने पांच प्वाइंट में अपनी बात बताई।
1. सिर्फ अपनी राजनीति के कारण, मंत्री प्रधान ने लगातार इस बात को मानने से इनकार किया कि NEET-UG 2026 परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। परीक्षा रद होने के बाद अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री प्रधान ने जानबूझकर 'लीक' शब्द का इस्तेमाल करने से परहेज किया।
शिक्षा मंत्रालय ने मई 2020 में शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति के सामने आधिकारिक तौर पर पेपर लीक होने की बात से इनकार किया था। अपने इस्तीफे के पत्र में भी, मंत्री प्रधान ने बेशर्मी से 'पेपर लीक' शब्द का इस्तेमाल करने से इनकार किया और इसके बजाय 'अनियमितताओं' का ज़िक्र करते रहे।
जब मंत्री यह मानने को ही तैयार न हों कि असल में क्या गड़बड़ हुई थी, तो निष्पक्ष जांच या जवाबदेही की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती।
2. शिक्षा मंत्रालय को संभालने में मंत्री प्रधान जानबूझकर असंवेदनशील रहे। अकेले 2024 में NTA के कार्यकाल में कम से कम पांच बड़े पेपर लीक और परीक्षाएं रद होने की घटनाएं हुईं।
सुधारों को गंभीरता से लागू करने के बजाय, मंत्री प्रधान ने टालमटोल की और घोर लापरवाही दिखाई। NTA में सबसे अहम कार्यकारी पद - डायरेक्टर जनरल - का काम 2024 के पेपर लीक और 2026 के पेपर लीक के बीच की पूरी अवधि में अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त प्रभार के तौर पर संभाला जाता रहा।
मंत्री की दिलचस्पी भारत के युवाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने के बजाय BJP के लिए चुनाव प्रचार संभालने में ज्यादा थी।
3. मंत्री प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय में भारी भ्रष्टाचार भी हुआ। NTA तो गड़बड़ियों का सबसे बड़ा केंद्र बन ही गया था, लेकिन लंबे समय से यह खबरें आती रही हैं कि वाइस चांसलर और फैकल्टी के पद धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं।
नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल, इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, टाटा इंस्टीट्यूट फॉर सोशल साइंसेज, तेजपुर यूनिवर्सिटी और शिलांग में नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी जैसे कई प्रतिष्ठित केंद्रीय सरकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार के आरोप खुलेआम सामने आए हैं (अक्सर खुद CBI द्वारा)।
4. 'मंत्री प्रधान' का काम मुख्य रूप से राजनीति से प्रेरित था, न कि अच्छे प्रशासन या छात्रों की चिंता से। शिक्षा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में 'सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन' जैसी सलाह देने वाली कमेटियों की एक बार भी बैठक नहीं बुलाई गई।
जब शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने NTA में सुधार के लिए सुझाव दिए, तो उन्होंने उन्हें इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि समिति में विपक्ष के सदस्य भी शामिल थे।
जब भारत के छात्र सड़कों पर उतरे, तो दिल्ली पुलिस ने उन पर बेरहमी से हमला किया, लेकिन 'मंत्री प्रधान' ने कोई जवाबदेही दिखाने के बजाय बेरुखी से सब कुछ देखा। उन्होंने हमेशा नीति के बजाय राजनीति को प्राथमिकता दी।
5. 'मंत्री प्रधान' के कार्यकाल में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) में भी एक बड़ी गड़बड़ी हुई। CBSE की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम' (OSM) का कॉन्ट्रैक्ट एक ऐसी कंपनी को दिया गया जिसका पिछला रिकॉर्ड खराब था।
'जेन-Z' के दो छात्रों ने खुलासा किया कि OSM के लिए CBSE का साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर कितना असुरक्षित था, और कॉन्ट्रैक्ट का टेंडर 3 बार निकाला गया ताकि आखिर में जीतने वाली कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके।
जवाबदेही तय करने के नाम पर CBSE के चेयरमैन और सेक्रेटरी का तबादला कर दिया गया, जबकि 'मंत्री प्रधान' अपने पद पर बने रहे।
खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्य वाला आयोग बनाया गया था, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है, जबकि आयोग की रिपोर्ट आने की एक महीने की समय-सीमा भी खत्म हो चुकी है।
यह भी पढ़ें- 'युवाओं की भावनाओं का सम्मान, 10 दिन से मन दुखी था'; धर्मेंद्र प्रधान ने चिट्ठी में क्या-क्या लिखा?