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    पश्चिम एशिया युद्ध: क्या पेट्रोल के बढ़ने वाले हैं दाम? क्रूड ऑयल में तूफानी तेजी, क्या है भारत का प्लान

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 09:51 PM (GMT+05:30)

    पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। भारत, जो अपनी अधिकांश ऊर्जा आयात करता है, इस संकट से निपटने के ...और पढ़ें

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की आग में लगभग बंद होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल व गैस ढोने वाले जहाजों की आवाजाही कब सामान्य होगी, यह कहना मुश्किल है।

    भारी अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों को विगत पांच हफ्तों में पांचवी बार 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है। अपनी जरूरत का 87 फीसद तेल व करीब 60 प्रतिशत प्राकृतिक गैस आयात करने वाला भारत इस वैश्विक तूफान से निपटने में हरसंभव कोशिश कर रहा है।

    इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित अंतर-मंत्रालीय समूह, कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों के अलावा पेट्रोलियम-विदेश-जहाजरानी मंत्रालयों के बीच गठित विशेष समिति के अलावा भी कुछ दूसरी बैठकें लगातार हो रही हैं।

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    क्या 150 डॉलर तक बढ़ेंगे कच्चे तेल के दाम?

    इन बैठकों में सबसे अहम सवाल यही होता है कि अगर यह संकट और लंबा खिंचा तो क्या होगा? क्योंकि कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और वॉल स्ट्रीट के दिग्गज पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि कीमतें 140 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय का डाटा बताता है कि अप्रैल में भारत ने 125.88 डॉलर की दर से क्रूड खरीदी है।

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    जो फरवरी, 2026 में भारत की औसत खरीद 69.01 से दोगुनी है। मार्च, 2026 में भारत ने 113.49 डॉलर की दर से कच्चे तेल की खरीद की थी। अब अगर गोल्डमैन सैक्स की बात मानें तो उसमें कहा गया है कि अपनी रिपोर्ट में ब्रेंट क्रूड 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुचने, आईएनजी की रिपोर्ट के मुताबिक भी कीमत के 140 डॉलर तक जा सकती है।

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    क्या कहती है रिपोर्ट?

    ब्लूमबर्ग के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि दो महीने तक होर्मुज बंद रहा तो कीमतें लगभग 140 डॉलर और तीन महीने तक चले जाने पर 165 डॉलर तक पहुंच सकती है। जबकि सोमवार को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्रेंट क्रूड 108.50 से 110.67 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रही है।

    प्राकृतिक गैस और एलएनजी की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। 28 फरवरी की तुलना में ब्रेंट क्रूड में करीब 33 प्रतिशत की भारी वृद्धि हो चुकी है। अगर क्रूड की कीमत 130-140 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गई तो भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल) पर बेहद गंभीर असर पड़ेगा।

    बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

    इन कंपनियों का घाटा कई गुना बढ़ जाएगा क्योंकि पहले से ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने हाल ही में स्वीकार किया है कि पेट्रोल पर 26 रुपये और डीजल पर 103 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी चल रही है। इतनी ऊंची कीमत पर अंडर-रिकवरी और बढ़ जाएगी, जिससे कंपनियों को अरबों रुपये का अतिरिक्त घाटा उठाना पड़ सकता है।

    Petrol Diesel Price Review

    सरकार को सब्सिडी का बोझ बढ़ाना पड़ेगा या फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं, दोनों ही विकल्प राजनीतिक और आर्थिक रूप से मुश्किल हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि हम पश्चिम एशिया में विवाद में शामिल देशों के बीच चल रही वार्ताओं पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। स्थिति अभी अनिश्चित है, लेकिन अगले कुछ हफ्तों में कोई भी युद्ध विराम पर सहमति बन जाती है तो कीमतें तेजी से नीचे जा सकती हैं।