बंगाल: पुलिस के लिए चुनौती बना ‘पत्थर सम्राट’ टुल्लू मंडल का करोड़ों के लेनदेन, रहस्य सुलझाने में अब जुटे विशेषज्ञ
बीरभूम के 'पत्थर सम्राट' टुल्लू मंडल के करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन का हिसाब पुलिस के लिए चुनौती बन गया है, क्योंकि खातों में सांकेतिक भाषा का प्र ...और पढ़ें

'पत्थर सम्राट' टुल्लू मंडल।
HighLights
टुल्लू मंडल के करोड़ों के वित्तीय लेनदेन की जांच।
सांकेतिक खातों को समझने में पुलिस को चुनौती।
पूर्व सीए अर्पित पारेख कर रहे विश्लेषण, सीआईडी भी शामिल।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बीरभूम के चर्चित ‘पत्थर सम्राट’ टुल्लू मंडल के कथित करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन का हिसाब अब पुलिस के लिए नई चुनौती बन गया है। टुल्लू के अकाउंटेंट पिनाकी देव और उनके सहयोगी पार्थसारथी से पूछताछ के बाद पुलिस ने दो लैपटाप, कई पेन ड्राइव और हार्ड ड्राइव जब्त किए हैं।
इनमें टुल्लू के कारोबार से जुड़े बड़ी संख्या में वित्तीय रिकार्ड मौजूद हैं, लेकिन खातों में सामान्य भाषा के बजाय संक्षिप्त शब्दों, संकेतों और विशेष लेखा पद्धति का इस्तेमाल किए जाने से इनका अर्थ समझना आसान नहीं है।
किसे मिली जांच की जिम्मेदारी?
मामले की पेचीदगी को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी बोलपुर के एसडीपीओ अर्पित आर पारेख को दी गई है। आईपीएस बनने से पहले वह चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम कर चुके हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले सात दिनों से वह सिउड़ी थाने में बैठकर जब्त डिजिटल रिकार्ड में दर्ज संकेतों और वित्तीय विवरणों का विश्लेषण कर रहे हैं।
उनका काम इन सांकेतिक विवरणों को समझकर करोड़ों रुपये के लेनदेन का मिलान करना और उसे जांच के अनुकूल व्यवस्थित करना है। इसके लिए वित्तीय रिकार्ड को टैली और एक्सेल शीट में दर्ज कर लेनदेन की पूरी सूची तैयार की जा रही है। साथ ही दोनों अकाउंटेंट से लगातार पूछताछ कर रिकार्ड में दर्ज लेनदेन के वास्तविक स्रोत और गंतव्य की जानकारी जुटाई जा रही है।
डिजिटल रिकार्ड से छेड़छाड़ की आशंका
पुलिस को यह आशंका भी है कि टुल्लू मंडल के कथित वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल फाइलें पहले ही हटाई या छिपाई गई होंगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मिनार मंडल के घर पर शुरुआती छापेमारी की जानकारी अकाउंटेंट तक पहुंच गई थी। इसलिए जब्त उपकरणों में मौजूद डेटा के साथ छेड़छाड़ की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा रहा है।
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इसी वजह से जांच में सीआइडी की विशेष तकनीकी टीम को भी शामिल किया गया है। अत्याधुनिक डिजिटल फोरेंसिक तकनीक के जरिए लैपटाप, हार्ड ड्राइव और अन्य स्टोरेज उपकरणों की जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य हटाई गई या छिपाई गई फाइलों को तलाशने के साथ टुल्लू मंडल के कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन की पूरी तस्वीर सामने लाना है।