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    भारत-अमेरिका के बीच कहां अटकी ट्रेड डील? सरकार ने दी जानकारी

    By Rajeev KumarEdited By: Sakshi Gupta
    Updated: Fri, 24 Apr 2026 11:00 PM (IST)

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते का कानूनी मसौदा अभी तैयार नहीं हो सका है, हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच सकारात्मक बातचीत जारी है। ...और पढ़ें

    भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी (जागरण)

    भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी (जागरण)

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर वैधानिक मसौदा तैयार नहीं हो सका। गत 20 अप्रैल को वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का एक दल समझौते से जुड़े मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका गया था।

    गत सात फरवरी को दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए राजी होने का एलान किया था। तब तय हुआ था कि समझौते पर हस्ताक्षर के लिए दोनों देश मिलकर वैधानिक मसौदा तैयार करेंगे। फिर उन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

    भारत-अमेरिका के बीच डील पर चर्चा जारी

    वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि दोनों देशों के बीच एक-दूसरे के लिए बाजार की पहुंच, डिजिटल व्यापार, व्यापार के बीच में आने वाली तकनीक बाधा, कस्टम व व्यापार को सहज करने, एक-दूसरे की आर्थिक सुरक्षा व निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

    अमेरिका में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई और आगे भी यह बातचीत जारी रहेगी। हालांकि दोनों देशों के बीच मसौदे को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

    भारत में कोई देश नहीं बेच सकता डेरी प्रोडक्ट

    सूत्रों का कहना है कि भारत मुख्य रूप से अमेरिका को कृषि आइटम की बिक्री की इजाजत नहीं देना चाहता है। भारत पहले ही इस बात को स्पष्ट कर चुका है कि किसानों के हितों को देखते हुए कृषि व डेरी सेक्टर को किसी भी देश के लिए नहीं खोला जाएगा। हाल ही में ब्रिटेन के साथ होने वाले व्यापार समझौते में भी कृषि व डेरी को समझौते से दूर रखा गया।

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    सूत्रों का कहना है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर फिलहाल भारत जल्दी में भी नहीं है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल सभी देशों पर अमेरिका के बाजार में 10 प्रतिशत का शुल्क लग रहा है। इससे पहले भारत पर 50 प्रतिशत का शुल्क लग रहा था।

    पिछले साल अप्रैल में अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत के पारस्परिक शुल्क लगाने की घोषणा की थी। उसके बाद रूस से तेल खरीदने के कारण जुर्माने के रूप में और 25 प्रतिशत का शुल्क लगा दिया गया।

    भारत यह भी स्पष्ट कर चुका है कि अमेरिका के साथ समझौता करने में इस बात पूरा ध्यान रखा जाएगा कि अमेरिका के बाजार में भारत को अपने प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले कितनी बढ़त मिल रही है। मतलब भारत चाहता है कि अमेरिका में भारतीय आइटम पर लगने वाले शुल्क चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, बांग्लादेश जैसे देशों से कम रहे।

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