'वक्फ संस्थानों को क्यों मिले छूट?', सुप्रीम कोर्ट ने अदालती शुल्क न देने पर पूछा कानूनी आधार
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ न्यायाधिकरणों में वक्फ संस्थानों को अदालती शुल्क के भुगतान से छूट देने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया है। ...और पढ़ें
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सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संस्थानों से पूछा सवाल (फोटो-पीटीआई)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्य वक्फ न्यायाधिकरणों के समक्ष कार्यवाही में वक्फ संस्थानों को अदालती शुल्क के भुगतान से छूट देने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने ये टिप्पणियां गुजरात हाई कोर्ट के दिसंबर, 2025 के उस आदेश के विरुद्ध दायर याचिका की सुनवाई करते हुए की, जिसमें अदालती शुल्क नहीं देने के कारण वक्फ मुकदमों को खारिज करने का फैसला बरकरार रखा गया था।
हाई कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले पर भरोसा किया जिसमें कहा गया था कि वक्फ संस्थाएं, राज्य वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष अदालती शुल्क देने से मुक्त नहीं हैं।
याचिकाकर्ता ने मांगा समय
याचिकाकर्ताओं के वकील एजाज मकबूल ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगा। लेकिन जस्टिस नरसिम्हा ने उनसे अदालती शुल्क से छूट के दावे का आधार पूछा, 'छूट कैसे मिल सकती है? वह कौन सा कानून है जो आपको अदालती शुल्क से छूट मांगने की अनुमति देता है?'
मकबूल ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तार से जवाब दाखिल करेंगे और सुनवाई सात अगस्त तक स्थगित करने का आग्रह किया
गुजरात हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2025 को वक्फ संस्थानों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिनमें गुजरात राज्य वक्फ न्यायाधिकरण के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें अपर्याप्त अदालती शुल्क के कारण वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों पर कार्यवाही को अस्वीकार कर दिया गया था।
अदालत ने कहा था कि वक्फ अधिनियम की धारा-83 के तहत कार्यवाही के लिए अदालती शुल्क के भुगतान से वक्फ संस्थानों को छूट हासिल नहीं है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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