सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पर जारी किए FAQs, विपक्ष को घेरने की तैयारी शुरू
महिला आरक्षण से जुड़े बिल के लोकसभा में पास न होने के बाद सरकार ने इससे जुड़े कई सवालों पर सफाई देते हुए FAQs जारी किए हैं। इसमें 2029 तक 33 प्रतिशत आ ...और पढ़ें

सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पर जारी किए FAQs (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल के पास न हो पाने के बाद सरकार ने रविवार को इससे जुड़े कई सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। सरकार ने FAQs के जरिए बताया कि महिलाओं को 33% आरक्षण कब और कैसे दिया जा सकता है, साथ ही परिसीमन और सीटें बढ़ाने को लेकर उठे विवादों पर भी जवाब दिया।
सरकार द्वारा जारी किए गए FAQs:-
सवाल:- 16 अप्रैल 2026 को सरकार ने लोकसभा में कौन से बिल पेश किए?
जवाब:- सरकार ने तीन अहम बिल पेश किए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026।
सवाल:- ये बिल अभी क्यों लाए गए?
जवाब:- 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत महिलाओं को आरक्षण लागू करने के लिए जनगणना और उसके बाद परिसीमन जरूरी बताया गया था। अगर सरकार जनगणना और परिसीमन का इंतजार करती, तो 2029 के चुनाव तक भी महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता, क्योंकि यह प्रक्रिया लंबी होती है। इसलिए समय पर महिलाओं को लाभ देने के लिए इस शर्त को अलग करने की जरूरत समझी गई।
सवाल:- अगर बिल पास हो जाते तो क्या फायदा होता?
जवाब:- इससे 2029 के लोकसभा चुनाव से ही महिलाओं को 33% आरक्षण मिल सकता था।
सवाल:- महिला आरक्षण को परिसीमन से क्यों जोड़ा गया?
जवाब:- परिसीमन का मतलब होता है निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करना। महिलाओं को आरक्षण देने के लिए यह जरूरी है। 1976 में लोकसभा सीटों की अधिकतम सीमा 550 तय की गई थी, जब देश की आबादी 54 करोड़ थी। अब आबादी करीब 140 करोड़ हो गई है, इसलिए प्रतिनिधित्व संतुलित करने के लिए सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव दिया गया।
सवाल:- क्या इसमें राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश थी?
जवाब:- सरकार के अनुसार परिसीमन आयोग के कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग की सिफारिशें संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही लागू होंगी। 2029 तक होने वाले सभी चुनाव मौजूदा व्यवस्था के अनुसार ही होंगे, इसलिए तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के चुनाव पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
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सवाल:- सीटें 850 तक क्यों बढ़ाने का प्रस्ताव था?
जवाब:- यह प्रस्ताव समान अनुपात में विस्तार पर आधारित था। यानी सभी राज्यों में लगभग 50% सीटें बढ़ाई जातीं, जिससे राज्यों का आपसी संतुलन बना रहता। 543 सीटों पर यह लागू करने से संख्या करीब 815 बनती है, इसलिए अधिकतम सीमा 850 तय की गई।
सवाल:- क्या दक्षिणी राज्यों को नुकसान होता?
जवाब:- नहीं, सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़तीं, इसलिए किसी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होता। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जातीं। दक्षिणी राज्यों की कुल हिस्सेदारी लगभग समान रहती।
सवाल:- क्या जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान होता?
जवाब:- नहीं, क्योंकि सीटें सभी राज्यों में समान रूप से बढ़तीं, इसलिए अनुपात नहीं बदलता।
सवाल:- क्या एससी-एसटी आरक्षण प्रभावित होता?
जवाब:- नहीं, सीटें बढ़ने से इनके लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी बढ़ती।
सवाल:- क्या यह बिल जाति जनगणना टालने के लिए लाया गया था?
जवाब:- नहीं, सरकार ने कहा कि जाति जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है।
सवाल:- मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग कोटा क्यों नहीं?
जवाब:- संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता, इसलिए ऐसा प्रावधान नहीं है।
सवाल:- 2024 चुनाव में महिला आरक्षण क्यों लागू नहीं हुआ?
जवाब:- परिसीमन की प्रक्रिया लंबी होती है और इसमें करीब दो साल लगते हैं, इसलिए इसे तुरंत लागू नहीं किया जा सका।
सवाल:- अलग कानून की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब:- जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभा अलग कानूनों से चलती है, इसलिए वहां महिला आरक्षण लागू करने के लिए अलग बिल जरूरी था।
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