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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 16, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Anubhav Mohanty : केंद्रपाड़ा सांसद अनुभव मोहंती को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत, अब पत्‍नी को जारी हुआ नोटिस

    Updated: Thu, 16 May 2024 03:39 PM (IST)

    Anubhav Mohanty सांसद अनुभव मोहंती को हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने अनुभव के नाम पर जारी गैर जमानती गिरफ्तारी परवाना (एनबीडब्ल्‍यू) पर रोक ...और पढ़ें

    सांसद अनुभव मोहंती को हाई कोर्ट से मिली राहत।
    सांसद अनुभव मोहंती को हाई कोर्ट से मिली राहत।

    HighLights

    1. एनबीडब्ल्‍यू के निचली अदालत के निर्देश को अनुभव ने दी थी चुनौती
    2. बीते सोमवार को अनुभव और उनके अन्य दो सहयोगियों के खिलाफ जारी हुआ था एनबीडब्ल्यू
    3. अब 8 जुलाई को होगी मामले की अगली सुनवाई

    संवाद सहयोगी, कटक। Anubhav Mohanty : सांसद अनुभव मोहंती को बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने अनुभव के नाम पर जारी गैर जमानती गिरफ्तारी परवाना (एनबीडब्ल्‍यू) पर रोक लगा दी है। निचली अदालत  एनबीडब्ल्‍यू के निर्देश को चुनौती देते अनुभव की ओर से एक पिटीशन दर्ज की गई थी।

    अनुभव की पत्‍नी प्रियदर्शिनी को नोटिस जारी

    अदालत उस पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को उनके एनबीडब्ल्‍यू पर रोक लगा दी है एवं इस मामले में अनुभव की पत्नी वर्षा प्रियदर्शिनी को भी नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई को अदालत ने आगामी 8 जुलाई को होगी।

    विदित हो कि सांसद और विधायकों के मामलों की सुनवाई के लिए बनी जेएमएफसी अदालत ने पत्नी वर्षा के द्वारा कटक पुरीघाट थाने में दर्ज मामले में सुनवाई करते हुए पिछले सोमवार को अनुभव और उनके अन्य दो सहयोगियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी किया था।

    अदालत में हाजिर नहीं हो सके थे अनुभव

    अदालत ने पुरीघाट पुलिस थाना अधिकारी को मई 23 तारीख तक एनबीडब्ल्यू को लागू करने का निर्देश दिया था। आरोप तय करने के लिए अदालत ने अनुभव को दूसरी बार अदालत में पेश होने के लिए निर्देश दिया था।

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    वह अदालत में हाजिर न होने कारण और अदालत में टाइम पिटीशन के जरिए समय मांगने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।

    अदालत ने उनके दो सहयोगियों सुजीत दलेई और खगेंद्र प्रसाद साहू के नाम पर भी गैर जमानती वारंट जारी किया था।

    अनुभव निचली अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, उन्‍होंने हाई कोर्ट को बताया था कि तबीयत ठीक न होने की वजह से उन्‍होंने जेएमएफसी अदालत से समय मांगा था।

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