80 की उम्र में ‘गोल्डन हैट्रिक’, रिटायर्ड एएसपी ने जीते तीन स्वर्ण पदक; कालाहांडी का नाम किया रोशन
80 वर्षीय सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गा चरण मिश्रा ने नेपाल में आयोजित एसबीकेएफ इंटरनेशनल गेम्स-2026 में तीन स्वर्ण पदक जीतकर 'गोल्डन हैट् ...और पढ़ें

80 साल की उम्र में दुर्गा चरण मिश्रा ने जीते तीन स्वर्ण पदक।
HighLights
80 वर्षीय सेवानिवृत्त एएसपी दुर्गा चरण मिश्रा ने जीते तीन स्वर्ण पदक।
नेपाल के पोखरा में एसबीकेएफ इंटरनेशनल गेम्स में हासिल की उपलब्धि।
शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और भाला फेंक में 'गोल्डन हैट्रिक' पूरी की।
जागरण संवाददाता, अनुगुल(ओडिशा)। उम्र के 80वें पड़ाव पर जहां अधिकांश लोग जीवन की रफ्तार धीमी कर देते हैं, वहीं कालाहांडी के सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गा चरण मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय खेल मैदान पर अपनी फिटनेस, अनुशासन और अदम्य जज्बे से नई मिसाल कायम कर दी।
नेपाल के पोखरा में आयोजित एसबीकेएफ इंटरनेशनल गेम्स-2026 में मिश्रा ने 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए। मिश्रा ने शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और भाला फेंक तीनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर ‘गोल्डन हैट्रिक’ पूरी की।
उनकी इस उपलब्धि ने न केवल कालाहांडी जिले, बल्कि पूरे ओडिशा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया है। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत, नेपाल और श्रीलंका के करीब 300 अनुभवी एथलीटों ने हिस्सा लिया।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच मिश्रा ने अपने अनुभव और निरंतर अभ्यास के बल पर तीनों स्पर्धाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। खेलों से उनका नाता नया नहीं है। युवावस्था में दुर्गा चरण मिश्रा फुटबॉल और वॉलीबॉल के बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं।
उन्होंने दोनों खेलों में ओडिशा टीम की कप्तानी भी की। पुलिस सेवा के दौरान जिम्मेदारियों के साथ खेलों के प्रति उनका लगाव बना रहा और सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खेल मैदान को ही अपनी नई कर्मभूमि बना लिया। मास्टर्स एथलीट के रूप में मिश्रा कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अनेक पदक जीत चुके हैं।
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पोखरा में मिली उनकी ताजा सफलता ने यह साबित कर दिया कि खेल के लिए उम्र नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर मेहनत मायने रखती है। उनकी उपलब्धि के बाद कालाहांडी में खुशी का माहौल है।
खेलप्रेमियों और स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि दुर्गा चरण मिश्रा ने नई पीढ़ी के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों को भी यह संदेश दिया है कि जुनून जिंदा हो तो उम्र केवल एक आंकड़ा है।