गौतम अडानी की रायगड़ा में दस्तक, ₹1.08 लाख करोड़ के निवेश से ओडिशा के औद्योगिक भविष्य पर नजर
गौतम अदानी और जीत अदानी के रायगड़ा दौरे ने ओडिशा में अदानी समूह की 1.08 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित एकीकृत एल्युमीनियम परियोजना को लेकर उम्मीदें बढ़ ...और पढ़ें

गौतम अडानी ने थेरुबली प्लांट का दौरा। फोटो X@realpravat
HighLights
गौतम अदानी और जीत अदानी ने रायगड़ा का दौरा किया।
ओडिशा में 1.08 लाख करोड़ की एल्युमीनियम परियोजना प्रस्तावित।
दक्षिणी ओडिशा में निवेश और रोजगार की उम्मीदें बढ़ीं।
जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा में प्रस्तावित 1.08 लाख करोड़ रुपये की विशाल एकीकृत एल्युमीनियम परियोजना के बीच अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी और जीत अदानी के रायगड़ा दौरे ने दक्षिणी ओडिशा के औद्योगिक भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।
गौतम अदानी रविवार को हेलीकॉप्टर से रायगड़ा जिले के थेरुबली स्थित आईएमएफए संयंत्र पहुंचे। आईएमएफए ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में दौरे की पुष्टि करते हुए बताया कि कंपनी के लोकेशन हेड जी. वी. राकेश ने गौतम अदानी और जीत अदानी का स्वागत किया। इस दौरान आईएमएफए के औद्योगिक संचालन और क्षेत्र में चल रही कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व गतिविधियों पर संक्षिप्त चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, संयंत्र परिसर में करीब एक घंटे तक उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अदानी समूह की तकनीकी टीम ने क्षेत्र में भूमि की उपलब्धता, परिवहन संपर्क और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की स्थिति का आकलन किया।दौरे को रायगड़ा में संभावित औद्योगिक निवेश की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बॉक्साइट संसाधनों से समृद्ध जिले में एल्युमिना रिफाइनरी और ऊर्जा परियोजना की संभावनाओं पर पहले से चर्चा चल रही है। अदानी समूह की प्रस्तावित एकीकृत एल्युमीनियम परियोजना में एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमीनियम स्मेल्टर, डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम पार्क, कैप्टिव पावर प्लांट और हरित ऊर्जा इकाई शामिल होने की बात सामने आई है।
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रायगड़ा दौरे ने स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। हालांकि, परियोजना की अंतिम जगह, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।
दक्षिणी ओडिशा के लिए यह दौरा केवल एक औद्योगिक यात्रा नहीं, बल्कि संभावित निवेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि थेरुबली की यह मुलाकात कब जमीन पर उद्योग, रोजगार और क्षेत्रीय विकास के ठोस खाके में बदलती है।