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नंदनकानन जू में 5 ओरंगुटान बने खास मेहमान, मैसूर जू की सलाह पर बना विशेष डाइट चार्ट; खिलौनों से बहलाया जा रहा मन

By Pradeep Kumar SinghEdited By: Nishant Bharti
Published: Thu, 10 Sep 2026 10:22 AM (IST)

बालासोर जंगल से बचाए गए पांच नन्हे ओरंगुटान अब नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के विशेष मेहमान हैं। उनके लिए तापमान नियंत्रित ...और पढ़ें

HighLights

  1. बालासोर जंगल से बचाए गए पांच नन्हे ओरंगुटान नंदनकानन पहुंचे।

  2. विशेष डाइट, खिलौनों और चौबीसों घंटे निगरानी में क्वारंटाइन में हैं।

  3. भारत की मूल प्रजाति न होने से वन्यजीव तस्करी की आशंका।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर/भुवनेश्वर। जंगल में अचानक मिले पांच नन्हे ओरंगुटान अब नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के सबसे खास मेहमान बन गए हैं। बालासोर जिले के जंगल से मंगलवार को रेस्क्यू किए गए इन पांचों शिशु ओरंगुटान को  नंदनकानन लाया गया है। इनके लिए तापमान नियंत्रित क्वारंटाइन सेंटर तैयार किया गया है, जहां तीन पशु पालक और विशेष पशु चिकित्सा टीम चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है।

तीन नर और दो मादा ओरंगुटान को स्वास्थ्य जांच के बाद क्वारंटाइन में रखा गया है। इनमें से एक को बुखार था, जिसके बाद उसे दवा दी गई। फिलहाल सभी की हालत स्थिर बताई गई है। उनकी गतिविधियों पर सीसीटीवी से भी नजर रखी जा रही है।

हर दो घंटे में भोजन

नन्हे मेहमानों के लिए सामान्य डाइट नहीं, बल्कि विशेष डाइट चार्ट तैयार किया गया है। मैसूर जू से सलाह लेकर भोजन की व्यवस्था की गई है, क्योंकि वहां ओरंगुटान की देखभाल का अनुभव है।

दो बेहद छोटे ओरंगुटान को मैश किया हुआ आलू और सेब खिलाया जा रहा है। बाकी तीन केला और सेब खा रहे हैं। उन्हें दूध भी दिया जा रहा है। हर दो घंटे में भोजन कराया जा रहा है, ताकि उनकी कमजोर स्थिति में पोषण की कमी न हो।

खिलौने भी बने सहारा

नन्हे ओरंगुटान के लिए सिर्फ भोजन और इलाज का इंतजाम ही नहीं किया गया है। उन्हें व्यस्त और सहज रखने के लिए खिलौने भी उपलब्ध कराए गए हैं। क्वारंटाइन सेंटर में उनके व्यवहार और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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जू प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता इन्हें स्थिर करना है। इसके बाद इनके स्वास्थ्य और अन्य जरूरी परीक्षण किए जाएंगे।

देशी प्रजाति नहीं, इसलिए तस्करी का शक

इन पांच ओरंगुटान का जंगल में मिलना वन्यजीव अधिकारियों के लिए सामान्य घटना नहीं है। ओरंगुटान भारत या ओडिशा की मूल प्रजाति नहीं हैं। ऐसे में इनके बालासोर के जंगल तक पहुंचने ने वन्यजीव तस्करी की आशंका को जन्म दिया है।

जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इतने छोटे ओरंगुटान भारत तक कैसे पहुंचे और उन्हें बालासोर के जंगल में किसने छोड़ा। आशंका है कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।

फिलहाल नंदनकानन में इन पांचों की दुनिया भोजन, दवा, खिलौनों और निगरानी तक सिमटी है। जांच पूरी होने तक सबसे बड़ी चुनौती इनके जीवन को सुरक्षित रखना और यह पता लगाना है कि इन्हें जंगल तक पहुंचाने वाली कड़ी कहां से शुरू हुई थी।

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