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    फर्जी बिल और बैंक खातों के जरिए 8 करोड़ रुपये का घोटाला, ओडिशा में 6 लोग गिरफ्तार

    Updated: Sun, 10 May 2026 10:25 PM (IST)

    ओडिशा के भद्रक जिले में चांदबाली उप-कोषागार से जुड़े 8 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। ...और पढ़ें

    गिरफ्तार 6 आरोपी। (जागरण)

    गिरफ्तार 6 आरोपी। (जागरण)

    HighLights

    1. भद्रक जिले में 8 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय घोटाला।

    2. चांदबाली उप-कोषागार से जुड़े मामले में 6 लोग गिरफ्तार।

    3. फर्जी बिलों और खातों के जरिए सरकारी धन का गबन किया गया।

    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। भद्रक जिले में 8 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। ओडिशा विजिलेंस ने चांदबाली उप-कोषागार (सब-ट्रेजरी) कार्यालय से जुड़े इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई।

    मुख्य आरोपी की पहचान संतोष कुमार पंडा के रूप में हुई है, जो पहले चांदबाली सब-ट्रेजरी में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत था। पंडा के साथ उसके पांच सहयोगियों को भी विजिलेंस टीम ने गिरफ्तार किया है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने वर्ष 2018 से 2023 के बीच करीब 8.04 करोड़ रुपये के सरकारी धन का गबन किया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि 102 फर्जी बिलों के जरिए यह धोखाधड़ी की गई और रकम को 44 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।

    घोटाले का हुआ खुलासा

    बताया गया कि कई वर्षों तक ट्रेजरी सिस्टम की आधिकारिक वित्तीय प्रक्रियाओं में हेरफेर कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। फंड वितरण रिकॉर्ड में गड़बड़ी की जांच के दौरान इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ।

    गिरफ्तारी के बाद सभी छह आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बालेश्वर स्थित विशेष विजिलेंस अदालत में पेश किया गया।

    अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा फर्जी लेनदेन से जुड़े पूरे मनी ट्रेल का पता लगाया जा रहा है।

    जांच में सामने आया कि संतोष पंडा असली भुगतान होने के 5 से 6 महीने बाद तक इंतजार करता था, ताकि तुरंत शक न हो। वह अपने आधिकारिक लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर आइएफएमएस पोर्टल के ‘ग्रेच्युटी पेमेंट मेन्यू’ तक पहुंचता था।

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    इसके बाद वह वास्तविक पेंशनभोगी का मूल पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) नंबर और आईडी दोबारा दर्ज करता था। लेकिन पेंशनभोगी के खाते की जगह ‘थर्ड पार्टी जीपीओ (गवर्नमेंट पेंशन ऑर्डर) आईडी’ बनाकर राशि अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर देता था।

    आरोप है कि सब-ट्रेजरी अधिकारी, जो इस प्रक्रिया का अनुमोदन प्राधिकारी था, उसने अलग लॉगिन से इन बिलों को मंजूरी दी, बिना यह जांचे कि बिल का भुगतान पहले हो चुका है या लाभार्थी का विवरण मूल दस्तावेज से मेल खाता है या नहीं।

    विजिलेंस ने दर्ज किया केस

    इस मामले में ओडिशा विजिलेंस ने संतोष पंडा और उसके पांच सहयोगियों- शिव शंकर सामल, देव शंकर सामल, प्रफुल्ल कुमार राउत, संदीप कुमार मित्रा और अभय कुमार पंडा- के खिलाफ विजिलेंस सेल पीएस केस नंबर 03/2026 दर्ज किया है।

    आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 409, 467, 468, 471, 477 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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