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    ओडिशा में महंगे हुए अंडे: ₹9 रुपये पहुंचा दाम, प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए सरकार ने चला सब्सिडी का दांव

    By Agency Edited By: Rajat Mourya
    Updated: Mon, 20 Jul 2026 02:57 PM (GMT+05:30)

    ओडिशा में अंडों की कीमतें ₹7 से ₹9 प्रति पीस तक बढ़ गई हैं, जिसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि और घरेलू उत्पादन में कमी है। ...और पढ़ें

    ओडिशा में महंगे हुए अंडे, ₹9 रुपये पहुंचा दाम

    ओडिशा में महंगे हुए अंडे, ₹9 रुपये पहुंचा दाम

    HighLights

    1. ओडिशा में अंडे की खुदरा कीमत ₹9 तक पहुंची।

    2. अंतरराष्ट्रीय मांग और कम उत्पादन मुख्य कारण हैं।

    3. सरकार स्थानीय उत्पादन बढ़ाने को ₹1 करोड़ सब्सिडी दे रही।

    एजेंसी, भुवनेश्वर। ओडिशा में पिछले कुछ दिनों से अंडों (Odisha Eggs Price Latest) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ गया है। ओडिशा में 1 अंडे की रिटेल कीमत 7 रुपये से बढ़कर 9 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई है।

    मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक ने इस स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि ओडिशा अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है।

    क्यों बढ़ रहे अंडों के दाम?

    उन्होंने कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे 2 मुख्य कारण बताए हैं। पहला, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय अंडों की मांग में तेजी और दूसरा, घरेलू स्तर पर उत्पादन में गिरावट।

    मंत्री मल्लिक के अनुसार, पोल्ट्री फार्म से थोक में अंडा ₹7.15 की दर से बिक रहा है, जो खुदरा बाजार तक पहुंचते-पहुंचते ₹9 प्रति पीस हो जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण एशियाई और अफ्रीकी देशों में भारतीय अंडों का निर्यात बढ़ना है।

    इसके अलावा, इस साल पड़ी भीषण गर्मी और लू के चलते मुर्गियों की मौत का आंकड़ा बढ़ गया, जिससे अंडे के उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ा है।

    ओडिशा में हर साल कितने अंडों का होता है उत्पादन?

    गवर्नमेंट के डेटा के अनुसार, ओडिशा में हर साल लगभग 460 करोड़ अंडों का प्रोडक्शन होता है, जबकि राज्य की कुल सालाना जरूरत 800 से 900 करोड़ अंडों की है। इस भारी अंतर को पाटने के लिए सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

    मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए गंभीर है और इसके लिए अंडा उत्पादकों को ₹1 करोड़ तक की सब्सिडी दी जा रही है, ताकि भविष्य में राज्य इस मामले में आत्मनिर्भर बन सके।

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