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    वन्यजीव संरक्षण के रक्षक ही बने भक्षक, हाथी को काटकर 7 फीट गहरे गड्ढे में छिपाया; रेंजर निलंबित और ड्राइवर गिरफ्तार

    Updated: Fri, 23 Jan 2026 03:50 PM (IST)

    ओडिशा के कंधमाल में एक हाथी की मौत के बाद उसके शव को काटकर दफनाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। संयुक्त जांच में साक्ष्य नष्ट करने के दोषी पाए जाने पर ...और पढ़ें

    हाथी को काटकर 7 फीट गहरे गड्ढे में छिपाया

    हाथी को काटकर 7 फीट गहरे गड्ढे में छिपाया

    HighLights

    1. हाथी का शव काटकर सात फीट गहरे गड्ढे में दफनाया।

    2. बेलघर रेंज के रेंजर विनय कुमार बिशी निलंबित किए गए।

    3. ड्राइवर हृषिकेश पंडा गिरफ्तार, जेसीबी का उपयोग हुआ।

    जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा में वन्यजीव संरक्षण तंत्र को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। कंधमाल जिले के बालीगुड़ा वन प्रभाग में हाथी की मौत के बाद शव को काटकर दफनाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। संयुक्त जांच में साक्ष्य नष्ट करने का दोषी पाए जाने पर बेलघर रेंज के रेंजर विनय कुमार बिशी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि उसका ड्राइवर हृषिकेश पंडा गिरफ्तार किया गया है। मामला उजागर होने के बाद वन विभाग और पुलिस में हड़कंप मच गया है।

    शव काटकर सात फीट गहरे गड्ढे में दफनाया

    जांच टीम ने हाथी का शव कालाहांडी जिले के केसिंगा थाना क्षेत्र के कांटेसिर गांव से बरामद किया। अधिकारियों के अनुसार शव को टुकड़ों में काटकर करीब सात फीट गहरे गड्ढे में दफनाया गया था। हाथी का धड़, सूंड और गर्दन अलग-अलग हिस्सों में मिले हैं। 

    यह स्थान निलंबित रेंजर के आवास के पास बताया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हाथी की मौत 5 जनवरी को मुंडुटी जंगल में हुई थी।

    जेसीबी से मिटाए गए साक्ष्य, तीन नामजद

    पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि शव को छिपाने के लिए जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया गया। ड्राइवर हृषिकेश पंडा ने इस साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई। पुलिस ने निलंबित रेंजर, ड्राइवर और जेसीबी मालिक अंतर्यामी साहू के खिलाफ मामला दर्ज किया है। निलंबित रेंजर फिलहाल फरार है।

    वन्यजीव अपराध में नहीं बख्शे जाएंगे दोषी

    वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुटिया ने घटना को गंभीर वन्यजीव अपराध बताते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को स्पष्ट कहा है कि इस मामले में शामिल किसी भी स्तर के अधिकारी या कर्मचारी को संरक्षण नहीं दिया जाए।

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