Odisha Weather Alert: ओडिशा में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा! एक के बाद एक बनेंगे 2 नए निम्न दबाव
ओडिशा में दो नए निम्न दबाव बनने की संभावना है, जिससे राज्य में बाढ़ का खतरा फिर से बढ़ गया है। इसके चलते उत्तर और तटीय ओडिशा में भारी बारिश की चेतावनी ...और पढ़ें

ओडिशा का मौसम ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )
HighLights
दो नए निम्न दबाव बनने से बाढ़ का खतरा।
उत्तर और तटीय ओडिशा में भारी बारिश की संभावना।
अगस्त में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में मौसम के असामान्य बदलाव ने चिंता बढ़ा दी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से पहले भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अनुमान लगाया था कि जून और जुलाई में राज्य में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।
अनुमान के अनुसार उत्तर ओडिशा में कम और दक्षिण ओडिशा में अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई थी। लेकिन स्थिति पूरी तरह उलट गई। लगातार बने निम्न दबाव और गहरे अवदाब के प्रभाव से तटीय क्षेत्रों से लेकर आंतरिक इलाकों तक इतनी तेज बारिश हुई कि कई स्थानों पर भीषण बाढ़ की स्थिति बन गई।
उत्तर ओडिशा में दिखेगा असर
उत्तर ओडिशा के लोग अभी तक बाढ़ के प्रभाव से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए हैं कि अब एक के बाद एक दो नए निम्न दबाव बनने की संभावना जताई गई है। गंगीय पश्चिम बंगाल और उससे सटे बांग्लादेश के ऊपर गुरुवार को एक चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बना है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह आगे चलकर अधिक सशक्त होकर निम्न दबाव क्षेत्र में बदल सकता है, जिसका सबसे अधिक असर उत्तर ओडिशा पर पड़ने की आशंका है।
12 अगस्त के आसपास आएगा एक और चक्रवाती परिसंचरण
आईएमडी ने यह भी अनुमान लगाया है कि 12 अगस्त के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती परिसंचरण विकसित हो सकता है। इसके प्रभाव से उत्तर और तटीय ओडिशा में भारी से अति भारी वर्षा होने की संभावना है। अगस्त के तीसरे सप्ताह में इसका असर पूरे राज्य में महसूस किया जा सकता है।
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अगले एक सप्ताह के भीतर दो निम्न दबाव क्षेत्रों के बनने की संभावना के कारण राज्य में बारिश का सिलसिला लगातार जारी रह सकता है। मौसम विभाग का मानना है कि अगस्त महीने की सबसे अधिक वर्षा इसी अवधि में हो सकती है।
अब तक केवल 45.3 मिमी वर्षा रिकॉर्ड
आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने में राज्य में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। हालांकि अगस्त में अब तक ओडिशा में सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस महीने सामान्य वर्षा का औसत 361 मिमी है, जबकि अब तक केवल 45.3 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
यदि पूरे मानसूनी मौसम (1 जून से 6 अगस्त तक) की बात करें तो राज्य में सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। लगातार निम्न दबाव बनने और मानसून के सक्रिय रहने के कारण वर्षा की मात्रा बढ़ी है।
सामान्य तौर पर जुलाई में 6 से 7 निम्न दबाव बनने की संभावना रहती है, लेकिन इस वर्ष केवल 3 निम्न दबाव बने। हालांकि इनका प्रभाव कुल 13 दिनों तक बना रहा। इनमें से एक निम्न दबाव का असर लगातार 6 दिनों तक रहने के कारण भारी वर्षा हुई और वर्षा का कुल आंकड़ा बढ़ गया।
मयूरभंज जिले के कुछ स्थानों पर भारी बारिश
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार शुक्रवार को मयूरभंज जिले के कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। वहीं बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, केंदुझर, गजपति और गंजाम जिलों के एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना को देखते हुए क्रमशः ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।
राज्य के अधिकांश जिलों में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। शनिवार और रविवार को विशेष रूप से केंदुझर और मयूरभंज जिलों में भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
पिछले 24 घंटों के दौरान भुवनेश्वर में 107.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा जाजपुर के जेनापुर में 106.8 मिमी, केंद्रापड़ा के पट्टामुंडई में 100 मिमी, कटक के माहांगा में 92 मिमी, निश्चिंतकोइली में 82 मिमी तथा कांटापाड़ा में 81 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।