ओडिशा हाई कोर्ट बड़ा का फैसला: तहसीलदारों के पास नहीं है बालू घाट की लीज रद करने का अधिकार
ओडिशा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि 2022 के संशोधन के बाद तहसीलदारों के पास बालू घाट की लीज रद्द ...और पढ़ें

HighLights
हाईकोर्ट ने तहसीलदारों के बालू लीज रद्द करने के अधिकार पर रोक लगाई।
2022 के संशोधन के बाद यह शक्ति खनन अधिकारियों को मिली।
व्यासनगर तहसीलदार का लीज रद्द करने का आदेश निरस्त किया गया।
जागरण संवाददाता, कटक। ओडिशा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि वर्ष 2022 में ओडिशा माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स (ओएमएमसी नियमावली) में संशोधन के बाद तहसीलदारों के पास बालू सैरात (बालू घाट) की लीज या नीलामी रद करने का अधिकार नहीं है।
इसके बावजूद राज्य में कई तहसीलदार इस प्रकार के आदेश जारी कर रहे हैं, जिस पर अदालत ने नाराजगी व्यक्त की है।अदालत ने कहा कि संशोधित नियमावली के तहत यह अधिकार तहसीलदारों से लेकर खनन अधिकारियों (माइनिंग ऑफिसर) को सौंप दिया गया है।
ऐसे में तहसीलदारों द्वारा जारी किए गए इस प्रकार के आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और कानूनन वैध नहीं माने जा सकते। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे आदेशों के कारण बड़ी संख्या में मामले हाईकोर्ट में पहुंच रहे हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश हरिश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस. रमण की खंडपीठ ने शशिकांत जेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने 17 जुलाई 2023 को व्यासनगर तहसीलदार द्वारा नयाहाटपटना बैतरणी नदी बालू स्रोत की लीज रद करने के आदेश को निरस्त कर दिया।
साथ ही निर्देश दिया कि इस मामले से संबंधित सभी अभिलेख दो सप्ताह के भीतर खनन अधिकारी को सौंपे जाएं। इसके बाद खनन अधिकारी स्वतंत्र रूप से मामले पर पुनर्विचार कर निर्णय लेंगे।
28 दिसंबर 2022 को प्रकाशित हुई थी राजपत्र अधिसूचना
मामले के विवरण के अनुसार, वर्ष 2022 में ओएमएमसी नियमावली में संशोधन किया गया था। इस संशोधन के तहत तहसीलदारों से लघु खनिज स्रोतों की लीज रद करने तथा कुछ अन्य अधिकार वापस लेकर खनन अधिकारियों को सौंप दिए गए थे। इस संबंध में 28 दिसंबर 2022 को राजपत्र (गजट) अधिसूचना जारी की गई थी।
याचिकाकर्ता को नयाहाटपटना स्थित बैतरणी नदी के बालू स्रोत की लीज मिली थी। बाद में 17 जुलाई 2023 को व्यासनगर तहसीलदार ने उक्त लीज रद कर दी और याचिकाकर्ता की सुरक्षा जमा राशि जब्त करने का भी आदेश दिया।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि तहसीलदार के पास ऐसी कार्रवाई करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था और उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया है। इस दलील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने तहसीलदार का आदेश रद कर दिया।
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