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    करोड़ों की लागत से बना ओडिशा का दूसरा बड़ा कोल्ड स्टोरेज अब 'कबाड़', चोरों ने बेच दी मशीनें

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 01:55 AM (IST)

    सुंदरगढ़ जिले के कुआरमुंडा में करोड़ों की लागत से बना ओडिशा का दूसरा बड़ा शीतगृह खंडहर में बदल गया है। चोरों ने इसकी मशीनें बेच दी हैं और इमारत जर्जर ...और पढ़ें

    ओडिशा का दूसरा बड़ा कोल्ड स्टोरेज

    ओडिशा का दूसरा बड़ा कोल्ड स्टोरेज

    HighLights

    1. कुआरमुंडा का करोड़ों का शीतगृह अब खंडहर में बदला।

    2. चोरों ने शीतगृह की मशीनें काटकर बेच दीं।

    3. किसान सस्ते दाम पर सब्जियां बेचने को मजबूर।

    जागरण संवाददाता, राउरकेला। किसानों द्वारा उत्पादित सब्जियों की मजबूरी में सस्ते दाम पर बिक्री रोकने के उद्देश्य से सुंदरगढ़ जिले के कुआरमुंडा ब्लॉक में राज्य का दूसरा बड़ा शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज) स्थापित किया गया था। डेयरी फार्म के पास लगभग 2 एकड़ जमीन पर उद्यानिकी विभाग द्वारा बनाया गया यह शीतगृह अब खंडहर में बदल चुका है। 

    पिछले कई वर्षों में एक के बाद एक सहायक उद्यान निदेशक यहां आकर स्थिति का निरीक्षण कर चुके हैं और 12 हजार टन क्षमता वाले नए शीतगृह की स्थापना का प्रस्ताव भी दिया गया, लेकिन आज तक सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। 

    मशीनों को चोरों ने काटकर बेचा

    एक समय था जब कुआरमुंडा का यह शीतगृह केवल सुंदरगढ़ ही नहीं, बल्कि पड़ोसी झारखंड के सैकड़ों किसानों के लिए भी बहुत उपयोगी था। यहां मौजूद विभिन्न मशीनों को चोरों ने काटकर बेच दिया है। 

    गोदाम की खिड़कियां, दरवाजे, यहां तक कि फर्श की टाइलें भी उखाड़कर ले जाई गई हैं। अब केवल कुछ जर्जर कमरे ही बचे हैं और चारों ओर जंगल झाड़ी उग आया है। पानपोष उद्यानिकी विभाग द्वारा यहां नया शीतगृह बनाने की कई बार योजना बनाई गई, लेकिन वह फाइलों में ही दबकर रह गई। 

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    सैकड़ों टन सब्जियां सुरक्षित रखी जाती थी

    पहले यहां नुआगांव के सब्जी उत्पादक किसानों की सैकड़ों टन सब्जियां सुरक्षित रखी जाती थीं और यहां से पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और यहां तक कि आंध्र प्रदेश तक भेजी जाती थीं। अब शीतगृह नहीं होने के कारण नुआगांव के सैकड़ों किसान हर साल अपनी उपज को मजबूरी में सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर हैं। 

    कड़ी मेहनत से हजारों क्विंटल सब्जियों का उत्पादन करने के बावजूद उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। लगभग 5 वर्ष पहले पूर्व सरकार ने नुआगांव के किसानों के प्रति तत्परता दिखाई थी। शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज) के लिए लगभग चार एकड़ से अधिक जमीन पर घेराबंदी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण किया गया। लेकिन आज तक न तो गोदाम का निर्माण हुआ और न ही शीतगृह की मशीनें लगाई जा सकीं।

    प्रस्तावित शीतगृह केवल कागजों तक ही सीमित

    किसान और स्थानीय नेताओं ने बार-बार विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया, फिर भी कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। यह प्रस्तावित शीतगृह केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। 

    यह परियोजना अब केवल घेराबंदी तक ही सीमित रह गई है। बिसरा, लाठीकटा, कुआरमुंडा, राजगांगपुर आदि ब्लॉकों के सब्जी उत्पादक किसानों को भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

    कुआरमुंडा में उद्यान विभाग की दो एकड़ जमीन पर नए शीतगृह निर्माण के लिए पूर्व सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। यदि 5 से 12 हजार टन क्षमता वाला शीतगृह बनाया जाता है, तो यह व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी पूर्ण क्षमता संपन्न हो सकता है। - डी. पटेल , सहायक निदेशक, कृषि उद्यान विभाग।