भुवनेश्वर में महाराष्ट्र मॉडल पर मिलेंगे किराये के मकान, सरकार लाएगी किफायती आवास योजना
भुवनेश्वर में नौकरी और पढ़ाई के लिए आने वाले हजारों लोगों को किराये के मकान की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार अब महाराष्ट्र मॉडल पर पात्र किरायेदारों के लिए किफायती किराये के मकान बनाने की योजना पर काम कर रही है।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
भुवनेश्वर में किराये के मकान की समस्या बढ़ी।
सरकार महाराष्ट्र मॉडल पर किफायती आवास बनाएगी।
EWS, LIG, MIG वर्ग को मिलेगा लाभ।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। नौकरी, पढ़ाई और बेहतर भविष्य की तलाश में राजधानी पहुंचने वाले हजारों लोगों के लिए किराये का मकान लेना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
आसमान छूता किराया, मकान मालिकों की शर्तें और अविवाहित युवाओं को मकान देने में आनाकानी से परेशानी और बढ़ गई है। अब राज्य सरकार इस समस्या का समाधान तलाश रही है। सरकार भुवनेश्वर में पात्र किरायेदारों के लिए किफायती किराये के मकान बनाने की योजना पर काम कर रही है।
महाराष्ट्र मॉडल का अध्ययन कर रही सरकार
शहरी आवास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र ने बताया कि सरकार महाराष्ट्र की तर्ज पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के साथ मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के लिए आवास तैयार करने की योजना बना रही है।
मुंबई दौरे के दौरान उन्होंने ईडब्ल्यूएस मॉडल के तहत प्रीकास्ट तकनीक से बनाए जा रहे मकानों का जायजा लिया था। इसके बाद ओडिशा में भी इसी तरह की व्यवस्था को लेकर सर्वे कराया गया है।
मंत्री ने बताया कि जल्द ही एक तकनीकी टीम विस्तृत सर्वे करेगी। टीम की रिपोर्ट के आधार पर भुवनेश्वर में मकानों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
16 से 75 हजार रुपये तक आय वालों पर नजर
प्रस्तावित मॉडल में आय के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। महाराष्ट्र में लागू मॉडल के अनुसार 16,000 से 50,000 रुपये मासिक आय वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवार तथा 50,000 से 75,000 रुपये मासिक पारिवारिक आय वाले मध्यम आय वर्ग के परिवार आवासीय सहायता के दायरे में आते हैं। ओडिशा में पात्रता की अंतिम शर्तें अभी तय नहीं हुई हैं।
हर साल लाखों लोग आते हैं भुवनेश्वर
राजधानी में रोजगार, शिक्षा और कारोबार के अवसरों के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग दूसरे जिलों और राज्यों से आते हैं। इनमें विद्यार्थी, नौकरीपेशा युवा, श्रमिक और छोटे कारोबारी शामिल हैं। ऐसे लोगों के लिए कम किराये में सुरक्षित और सुविधाजनक आवास की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पात्रता और मकानों की संख्या पर फैसला बाकी
सरकार की इस पहल से किरायेदारों को राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन योजना को जमीन पर उतारने से पहले कई बिंदुओं पर फैसला होना बाकी है। इनमें पात्र लाभार्थियों की पहचान, आय सीमा, किराये की दर, आवेदन प्रक्रिया और बनाए जाने वाले मकानों की संख्या प्रमुख हैं।
यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो भुवनेश्वर में किराये के मकान की तलाश कर रहे हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। साथ ही राजधानी में किफायती आवास की बढ़ती मांग को भी काफी हद तक पूरा किया जा सकेगा।
